नई दिल्ली/दक्षिण भारत। दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने मंगलवार को 'आप' के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की, क्योंकि साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने पर वे चुप रहे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा, 'दोषी ठहराए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह चुप क्यों हैं? वे सामने आकर इस मामले पर कुछ क्यों नहीं कह रहे हैं?'
'आप' ने सोमवार को एक बयान जारी कर साफ़ किया कि हुसैन का पार्टी से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों के मामले में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज होने के बाद साल 2020 में उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था।
मिश्रा ने सवाल उठाया कि उस समय की दिल्ली सरकार और उसके नेताओं ने शर्मा की हत्या के विरोध में या पीड़ितों से मिलने के लिए दंगों के दौरान आवाज़ क्यों नहीं उठाई?
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में 'आप' के पूर्व पार्षद हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया।
दोषी ठहराए जाने का ज़िक्र करते हुए मिश्रा ने कहा कि अदालत के फ़ैसले से हत्या में हुसैन की भूमिका साबित हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले ने उन लोगों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिन्होंने पहले उसका समर्थन या बचाव किया था।
उन्होंने दंगों के समय 'आप' नेताओं के बयानों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने पीड़ितों के प्रति कोई चिंता नहीं दिखाई।
उन्होंने आगे कहा, 'दंगों के समय आप नेता दूसरे समुदाय के इलाकों में राहत कैंप लगा रहे थे और अब वे खुद को सनातन परंपराओं का अनुयायी बता रहे हैं।'
मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि साल 2020 के दंगों के पीछे एक बड़ी साज़िश थी। उन्होंने कहा कि भले ही अदालत ने शर्मा हत्याकांड में अपना फ़ैसला सुना दिया, लेकिन मामले के अन्य पहलुओं पर कानूनी कार्यवाही के ज़रिए फ़ैसला किया जाएगा।
इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात शर्मा 25 फरवरी, 2020 को ऑफिस से घर लौटे और फिर दोबारा बाहर निकले थे। जब वे वापस नहीं लौटे, तो उनके परिवार ने उन्हें खोजना शुरू किया और बाद में पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई थी।