नई दिल्ली/दक्षिण भारत। राजग भागीदार एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को भरोसा जताया कि भाजपा बिहार की बांकीपुर सीट बरकरार रखेगी। इस सीट पर पार्टी को नया उम्मीदवार उतारना पड़ा था, क्योंकि 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव की दौड़ से उसके तत्कालीन उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया था।
यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख ने यह भी कहा कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर, जो इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा।
पासवान का यह बयान भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा के उपचुनाव से अचानक हटने के एक दिन बाद आया है। सिन्हा ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया था, जिसके बाद भाजपा ने उनकी जगह अपनी युवा शाखा के नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया।
पासवान ने कहा, 'भाजपा उम्मीदवार (अभिषेक कुमार सिन्हा) को लेकर मीडिया में कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं बस इतना ही कहूंगा कि आने वाले उपचुनाव में बांकीपुर की जनता भाजपा उम्मीदवार को ही चुनेगी। हम सभी पांच राजग सहयोगी दल (बिहार में) उनका समर्थन करेंगे।'
नामांकन भरने के बाद अभिषेक कुमार के दौड़ से हटने को लेकर अटकलों को शांत करने की कोशिश करते हुए, पासवान ने कहा, 'यह बात अहम नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। अलग-अलग वजहों से पहले भी कई बार ऐसे फैसले लिए गए हैं। अहम बात यह है कि आखिर उस सीट से कौन चुना जाएगा।'
पासवान ने कहा कि जीतने वाले को केंद्र और बिहार, दोनों सरकारों का हिस्सा होना चाहिए ताकि वह लोगों तक दोनों सरकारों की योजनाओं का फ़ायदा पहुंचा सके। उन्होंने कहा, 'बांकीपुर के लोग यह बात समझते हैं। इसीलिए इस सीट से अब तक लगातार नौ बार भाजपा उम्मीदवार चुने गए हैं।'
जब पूछा गया कि क्या प्रशांत किशोर उस सीट से अपना खाता खोल पाएंगे, तो पासवान ने कहा, 'वे नहीं खोल पाएंगे।'
उन्होंने कहा, 'इसके पीछे एक वजह है। आप बिहार जैसे राज्य में अराजकता की सोच को बढ़ावा नहीं दे सकते, जहां हर व्यक्ति राजनीतिक रूप से जागरूक और समझदार है।' उन्होंने आरोप लगाया कि किशोर 'अराजकता की सोच' के साथ काम करते हैं।
पासवान ने आरोप लगाया कि जन सुराज के संस्थापक के पास बिहार के विकास के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है, 'किसी को भी उनका विचार समझ नहीं आता। इसीलिए वे बिहार विधानसभा चुनावों में अपना खाता भी नहीं खोल पाए।'