नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में कामकाज ठप हो गया है, क्योंकि मंत्री भूपेंद्र यादव के चार करीबी सहयोगियों को दो दिनों में हटा दिया गया।
कांग्रेस नेता एवं पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मंत्रालय ने देश में पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा के लिए बहुत कम काम किया है और 'पर्यावरण मंत्रालय अब प्रवचन मंत्रालय बन गया है।'
'मोदी सरकार के कार्यकाल में, मंत्रियों के निजी स्टाफ़ में सभी अहम नियुक्तियों की जांच पीएमओ द्वारा की जाती है।'
रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के 4 करीबी सहयोगियों को लगातार दो दिनों में दो बैच में हटा दिया गया है। इनमें से एक सहयोगी को संबंधित मंत्री का सबसे करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता है।'
उन्होंने आरोप लगाया, 'साफ़ है कि इस अहम मंत्रालय में कामकाज का सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है। इसने हाल के वर्षों में पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए बहुत कम काम किया है।'
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देशभर में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का सिलसिला लगातार जारी है, जिसमें ग्रेट निकोबार, मध्य और पूर्वी भारत के घने जंगल, अरावली पर्वतमाला और जैव-विविधता से भरपूर अन्य इकोसिस्टम शामिल हैं।
रमेश ने कहा, 'वायु प्रदूषण का जन-स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन जिन मानकों को अपडेट और लागू करने की ज़रूरत है, वे नहीं किए जा रहे हैं। ऐसी कई बातें हैं। लेकिन क्या मोदी सरकार को इसकी कोई परवाह है? पर्यावरण मंत्रालय अब 'प्रवचन मंत्रालय' बन गया है।'
3 जुलाई को जारी अलग-अलग आधिकारिक आदेशों के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय ने यादव के निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को एक साथ हटा दिया।