राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफ़ा स्वीकार किया

कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया

Photo: srjbtkshetra FB Page

अयोध्या/दक्षिण भारत। चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में राम मंदिर ट्रस्ट ने सोमवार को चंपत राय का महासचिव पद से और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है।

ट्रस्ट ने मंदिर ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुनने के वास्ते तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाने की भी घोषणा की। इस समिति में रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल हैं।
 
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने ट्रस्ट की तीन घंटे चली बैठक के बाद यह बात कही। इस बैठक में उस घोटाले के असर पर चर्चा की गई, जिसने भारी आक्रोश और राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई करने वाले भाजपा और संघ परिवार के लिए इस नुकसान को संभालना मुश्किल हो रहा है।

दी गई जानकारी के अनुसार, निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3,264 करोड़ रुपए में से 2,370 करोड़ रुपए निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है। प्रारंभ से लेकर 31 मार्च, 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ, जिसमें से 391 करोड़ रुपए की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। 

शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध हैं। ये समस्त वितीय सूचनाएं समय-समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं। चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में अनियमितता से न्यासीगण आहत एवं चिंतित हैं और इस दुर्भाग्यकारी प्रकरण पर गंभीर खेद व्यक्त करते हैं।

बताया गया कि इस प्रकरण की जानकारी प्राप्त होने पर पाया है कि ट्रस्ट के अधिकारियों ने अनियमितता के संज्ञान में आने पर प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने के बाद उतर प्रदेश शासन से निष्पक्ष जांच का आग्रह किया। ट्रस्ट के अनुरोध पर शासन ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष, व्यापक और तथ्यपरक जांच हो सके। 

किसकी क्या भूमिका रही, किन लोगों की संलिप्तता है तथा किसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए - इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल जांच के आधार पर ही संभव था। इसी उद्देश्य से ऐसे जांच दल के गठन के अनुरोध की पहल की गई।

एसआई टी की प्रारंभिक रिपोर्ट में 8 लोगों के नाम सामने आए। जिनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया और गिरफ्तारियां भी हुईे। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। 

ट्रस्ट ने कहा कि जो भी दोषी हो, उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होकर कठोरतम दंड मिलना चाहिए। एसआई कार्यक्षेत्र सिर्फ जांच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सुझाव देना भी है कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में क्या आवश्यक सुधार करने चाहिएं, जिससे व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, मजबूत एवं पारदर्शी हो सके।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद महामंत्री चंपत राय और एक ट्रस्टी अनिल मिश्र ने नैतिक आधार पर त्यागपत्र दिया है, जिन्हें आज ट्रस्ट की बैठक में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए नैतिक आधार पर दिए दोनों के त्यागपत्र को स्वीकार किया है। 

साथ ही, ट्रस्ट ने गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाने का निर्णय किया है। ट्रस्ट का मानना है कि जांच की वैधानिक परक्रिया पूरी होने पर सत्य प्रकाशित होगा और तब तक किसी भी व्यक्ति पर दोषारोपण करना उचित नहीं है।

ट्रस्ट ने प्रबंधन एवं संचालन की पद्धति और प्रणाली की कमजोरियों को दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। एसआईटी से अपेक्षित अनुशंसाओं के अतिरिक्त विशेषज्ञों से भी स्वतंत्र परामर्श लेने का सुझाव दिया है, जिससे मंदिर प्रबंधन की एक आदर्श, कुशल और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हो सके जो इस क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण बने।

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