यूजरनेम फीचर: सुविधा या खतरे की खिड़की?

इसके दूसरे पहलू को भी देखना चाहिए

साइबर अपराध की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हो सकती है

वॉट्सऐप ने जो यूजरनेम फीचर पेश किया, उससे सुरक्षा संबंधी कई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस भेजकर इस संबंध में उचित कार्रवाई की है। देश में करोड़ों लोग वॉट्सऐप का उपयोग करते हैं। अगर उक्त फीचर को लागू करते समय सुरक्षा संबंधी जोखिमों का आकलन नहीं किया गया तो भविष्य में साइबर अपराध की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यूजरनेम फीचर किसी उपयोगकर्ता को अपना फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने की सुविधा देता है। इसकी विशेषताएं जानकर ऐसा लग सकता है कि यह फोन नंबर साझा करने की जरूरत को खत्म कर उपयोगकर्ता की निजता को मजबूत करेगा। इसके दूसरे पहलू को भी देखना चाहिए। यह फीचर सामान्य उपयोगकर्ताओं को कुछ सुविधाएं जरूर देता है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग होने की आशंका है। क्या होगा अगर साइबर अपराधी यूजरनेम फीचर का उपयोग करने लग जाएं? वे एआई की मदद से लोगों को इतना नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। सोचिए, इस फीचर का उपयोग करते हुए, साइबर अपराधी हर किसी का नकली परिचित या रिश्तेदार बनकर रुपए मांगने लग जाएं तो कितने बैंक खाते खाली होंगे? पिछले पांच वर्षों में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए लूटे गए हैं। अगर ऐसे अपराधियों को वॉट्सऐप पर यूजरनेम फीचर जैसी सुविधा मिल गई तो उनके लिए अपनी पहचान छिपाना और ज्यादा आसान हो जाएगा। वे इस फीचर की मदद से बहुत ताकतवर होकर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाएंगे और उन्हें मिनटों में कंगाल बनाएंगे। देश में ऐसे कई गिरोह हैं, जो लोगों को फंसाते हैं, फिर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं। यूजरनेम फीचर से उनका काम बहुत आसान हो जाएगा। वे बदनाम करने की धमकियां देंगे और संबंधित व्यक्ति को नजर भी नहीं आएंगे।

हाल में एक राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी से वॉट्सऐप कॉल पर 10 लाख रुपए मांगे गए थे। साइबर ठग ने उन्हें अपना परिचय पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के सचिव के तौर पर दिया। उन्हें झांसा दिया गया कि आपकी मुलाकात उनसे कराई जाएगी। पदाधिकारी ने रुपए दे दिए। बाद में उन्हें ठगी का पता चला। अगर वॉट्सऐप का यूजरनेम फीचर लागू होता तो कई पदाधिकारी लपेटे में आते और ठगी की रकम करोड़ों में होती। पिछले महीने, देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे से 7.8 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई थी। उनकी कंपनी के कर्मचारी को फर्जी संदेश भेजकर रकम मंगवाई गई थी। कर्मचारी को इसलिए शक नहीं हुआ, क्योंकि डीपी में पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे नजर आ रहे थे। बस, गनीमत यह रही कि समय पर शिकायत करने से पुलिस ने चार करोड़ रुपए का भुगतान तुरंत रुकवा दिया था। जब ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के मौजूदा फीचर्स का पहले ही इतना दुरुपयोग हो रहा है तो एक और फीचर को आनन-फानन में लागू करना कितना सुरक्षित रहेगा, जबकि विशेषज्ञ इस पर सवाल उठा रहे हैं? साइबर अपराधी बड़े शातिर होते हैं। वे नए-नए हथकंडे अपनाकर तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब उन्होंने किसी मजबूत कंपनी को बड़ी आसानी से करोड़ों रुपए की चपत लगा दी। जनवरी 2023 में एक मामले ने दुनिया के तकनीकी विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया था। एक व्यक्ति ने मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी जानी-मानी फार्मा कंपनी का अकाउंट बनाया। उसके बाद शुल्क देकर ब्लू टिक लिया। फिर, उसने घोषणा की- 'हम इंसुलिन मुफ्त देने जा रहे हैं।' इससे कंपनी के शेयर के भाव गिरे और उसे करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ। अगर वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर में साइबर ठगी को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो कई कंपनियों को ऐसे नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।

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