'मन की बात' कार्यक्रम की 135वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ये शब्द 'संकल्प से सिद्धि' को दर्शाते हैं कि 'किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसके लोग होते हैं। जब लोग कोई संकल्प लेते हैं तो कोई भी शक्ति उन्हें अपने लक्ष्य से डिगा नहीं पाती है।' प्रधानमंत्री ने सत्य कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी की यह ताकत भारत की बहुत बड़ी पूंजी है। हाल में पश्चिम एशिया में अशांति फैलने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से जो अपील की, उसका गहरा असर दिखाई दिया। जो लोग हर साल छुट्टियां मनाने के लिए विदेश जाते थे, आज वे भारत में ही पर्यटन का लुत्फ उठा रहे हैं। लोगों ने ईंधन की बचत के लिए कई उपाय किए। ऐसे कई घर हैं जहां विवाह कार्यक्रम हुए, लेकिन उन्होंने सोना नहीं खरीदा। देशवासियों ने सोशल मीडिया पर एकता का संदेश दिया। जब समय मुश्किल हो तो परिवार के सदस्यों को इसी तरह एकजुट होना चाहिए। अगर जनभागीदारी इतनी मजबूत हो तो कोई संकट हमें अपने मकसद से डिगा नहीं सकता है। प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार की अनूठी पहल का जिक्र कर अन्य ग्रामवासियों को प्रेरणा दी है। उक्त परिवार ने घर में विवाह के अवसर पर पूरे गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों का दुर्घटना बीमा करवा दिया। इस तरह, पेठकर परिवार ने अपनी खुशियों में समस्त ग्रामवासियों को शामिल करते हुए उन्हें संबल दिया है। अगर ऐसी पहल हर गांव-शहर में होने लगे तो लोगों का जीवन कितना आसान हो जाए!
प्लास्टिक से पर्यावरण प्रदूषित होता है। अगर इसका अक्लमंदी से इस्तेमाल किया जाए तो यह हमारे गांवों और शहरों की सुंदरता बढ़ाने में योगदान दे सकता है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा गांव की महिलाओं ने ऐसा कर दिखाया है। उन्होंने प्लास्टिक कचरे और खाली बोतलों को इकट्ठा कर उन्हें 'इको ब्रिक्स' में बदल दिया। अगर हर गांव और शहर में इको ब्रिक्स बनाने का काम शुरू हो जाए तो प्लास्टिक कचरे से निजात मिल जाए। प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में अंधविश्वास पर भी जोरदार प्रहार किया है। असम में हरगिला नामक दुर्लभ पक्षी को अशुभ माना जाता था, जबकि यह पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जीव वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों के कारण अब लोगों की सोच बदल रही है। वे हरगिला से डरने के बजाय उसका संरक्षण कर रहे हैं। हालांकि यह काम आसान नहीं था। कई लोगों की रूढ़िवादी सोच इसमें बाधा बन रही थी। आखिरकार, पूर्णिमा देवी बर्मन और उनकी टीम की जीत हुई। आज हजारों लोग, जिनमें महिलाओं की बड़ी तादाद है, हरगिला को बचा रहे हैं और यह पक्षी पर्यावरण को बचा रहा है। प्रकृति में हर जीव-जंतु का महत्त्व होता है। आज कई जगह चिड़िया, तोता, मोर, बुलबुल, कौआ जैसे पक्षी दिखाई नहीं दे रहे हैं। इन पक्षियों पर कई लोकगीत लिखे गए हैं। इससे पता चलता है कि ये सदियों से हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। क्या भविष्य में ये सिर्फ किताबों और मोबाइल फोन में दिखाई देंगे? पक्षियों का संरक्षण करने के लिए उन्हें सुरक्षित महसूस कराना जरूरी होता है। इसके लिए ऐसे स्थान सुनिश्चित किए जाएं, जहां पक्षी अपना बसेरा बनाएं और उनकी गतिविधियों में कोई व्यक्ति व्यवधान न डाले। नागालैंड बेबी लीग भी सराहनीय पहल है। छोटे बच्चों को खेलकूद के लिए जरूर प्रेरित करना चाहिए। अगर बचपन से ही खेलकूद और योगाभ्यास की आदत डाल लें, इन्हें अपने जीवन का हिस्सा बना लें तो भविष्य में कई बीमारियों से सुरक्षा मिल जाए।