केतन हत्याकांड: कहां जा रहा समाज?

जो दो नावों पर सवार होता है, वह डूबता ही है

हमारे महान ऋषियों ने विवाह को एक पवित्र संस्कार माना था

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड ने जनमानस को झकझोर दिया है। इस मामले ने फिर एक बार यह सवाल खड़ा कर दिया है- आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है? इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी सिया गोयल, जो केतन की मंगेतर थी, के बारे में हो रहे खुलासे हैरान करने वाले हैं। वह अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ पिछले छह महीनों से लगातार संपर्क में थी। जब पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया तो पता चला कि दोनों ने एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किए थे और कुल 238 घंटे बातचीत की थी। इतनी लंबी बातचीत को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता है, खासकर तब, जब सिया की केतन के साथ सगाई हो चुकी थी। जो दो नावों पर सवार होता है, वह डूबता ही है। ऐसे मामलों में परिवार की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाती है। लड़का हो या लड़की, दोनों की सहमति लेना बहुत जरूरी है। अगर रिश्ता कहीं और हो रहा हो, मन कहीं और भटक रहा हो, तो परिवार के साथ खुलकर बात करें। अगर उस रिश्ते को हृदय से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं तो बेहतर होगा कि इस दिशा में आगे न बढ़ें। किसी इन्सान को हमसफ़र नहीं बनाना चाहते हैं तो साफ कह देना चाहिए। सिया गोयल को केतन पसंद नहीं था तो परिवार के सामने रिश्ते के लिए 'हां' बोलने और सोशल मीडिया पर झूठे प्रेम का नाटक करने की क्या जरूरत थी? अगर यह युवती पहले ही मना कर देती तो केतन आज जिंदा होता। यह सिर्फ एक मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ही ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कहीं हनीमून पर हत्या हो रही है। कहीं नीले ड्रम में लाश छिपाई जा रही है। कहीं हत्या पर पर्दा डालने के लिए फिल्मों और वेब सीरीजों से सीख ली जा रही है।

हमारे महान ऋषियों ने विवाह को एक पवित्र संस्कार माना था। आज कुछ लोगों ने दिखावेबाजी और अतिमहत्वाकांक्षा के फेर में पड़कर उसे कैसा रूप दे दिया? केतन हत्याकांड ने बेंगलूरु के एआई इंजीनियर अतुल सुभाष के मामले की यादें ताजा कर दी हैं। अतुल विवाहित थे। उनके तलाक का मुकदमा चल रहा था। उन्होंने कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाकर भयानक कदम उठाया था। उसके बाद सोशल मीडिया पर हजारों युवाओं ने टिप्पणियां की थीं कि उनका विवाह से विश्वास उठता जा रहा है। अब केतन अग्रवाल से संबंधित खबरों पर आ रहीं टिप्पणियां पढ़िए। देश का युवा क्या कह रहा है? वह उन्हीं बातों को और ज्यादा दृढ़ता से दोहरा रहा है। ऐसे कई युवा हैं, जो उच्च शिक्षित हैं, अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन आए दिन ऐसी खबरें पढ़कर विवाह नहीं करना चाहते हैं। भारत की कुल आबादी में ऐसे युवाओं का आंकड़ा अभी कम लग सकता है। ध्यान रखें, अगर ऐसे चार-पांच मामले और आ गए तो उक्त आंकड़ा बढ़ सकता है। इससे भविष्य में कई सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अगर यह चलन बढ़ता रहा तो परिवार टूट सकते हैं, अकेलापन बढ़ सकता है। इसे यह कहकर खारिज नहीं कर सकते कि ऐसा नहीं हो सकता है। जापान में ऐसा हो रहा है। हालांकि वहां युवाओं के विवाह न करने के कारण थोड़े अलग हैं। जापानी युवा अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं। इससे कई मानसिक समस्याएं पैदा हो रही हैं। भारत में ऐसा न हो, इसके लिए सरकार को कुछ कानूनी सुधार करने होंगे। विवाह को आसान बनाएं। इसमें आ रहीं जटिलताओं को दूर करें। जो लोग रिश्तों के नाम पर भयानक अपराध करते हैं, उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए।

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