शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए

शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना

Photo: @ShivsenaUBTComm X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इससे संकेत मिलता है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में उनका औपचारिक रूप से शामिल होना तय है। 

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया। साथ ही, पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद थे। बाकी छह सांसदों की गैर-मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय खेमे में फूट की बात लगभग पक्की कर दी।

बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश अष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। 
 
सूत्रों के मुताबिक, सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है।

हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि बिरला का कार्यालय वेरिफिकेशन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति चाहता है और आने वाले दिनों में ऐसा होने की उम्मीद है।
 
सूत्रों ने बताया कि अभी हस्ताक्षरों की जांच चल रही है। बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया, जिसमें उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया। इस कदम का मकसद बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्रवाई का रास्ता साफ करना था।

लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं और दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।
 
बैठक से पहले सावंत ने पत्रकारों से कहा, 'पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से सलाह-मशविरे के बाद व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'

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