शिमला/दक्षिण भारत। केंद्र से मिली अभूतपूर्व मदद के बावजूद, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार अवसरों को उपलब्धियों में बदलने में नाकाम रही। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को यह बात कही।
यहां मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस विकास और सुशासन, दोनों ही मोर्चों पर नाकाम रही है और राज्य में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में मिला भारी जनसमर्थन कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट फैसला है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तंज कसते हुए नड्डा ने कहा कि ऐसा लगता है मानो मुख्यमंत्री का पद ही 'अतिरिक्त प्रभार' के तौर पर चलाया जा रहा है और राज्य की असली बागडोर शिमला के बजाय दिल्ली से दूर से नियंत्रित की जा रही है।
उन्होंने कहा, 'सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने 'सिस्टम में बदलाव' का नारा दिया था, लेकिन आज राज्य प्रशासनिक अव्यवस्था, अनिर्णय और नीतिगत अराजकता के माहौल में घिरा हुआ है।'
नड्डा ने कहा, 'देश में शायद ही कोई और ऐसा उदाहरण हो जहां मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे अहम पदों का कामकाज 'अतिरिक्त प्रभार' के आधार पर चलाया जा रहा हो।'
जेपी नड्डा ने कहा कि वरिष्ठ नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं और अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। फिर भी जवाबदेही का कहीं अता-पता नहीं है।
नड्डा ने आरोप लगाया कि यह स्थिति कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलता और नेतृत्व संकट को उजागर करती है।
केंद्र की ओर से राज्य को दी गई मदद का ज़िक्र करते हुए नड्डा ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश को 2024-25 वित्तीय वर्ष में स्पेशल असिस्टेंस स्कीम, एनडीआरएफ और बाहरी मदद वाले प्रोजेक्ट्स के तहत 6,537 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता मिली।