यह कैसी कॉमेडी?

अभद्र कॉमेडी जल्दी मशहूर होती है

किसी जटिल मुद्दे को कॉमेडियन बड़ी आसानी से समझा सकता है

देश में स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता परोसने का ऐसा सिलसिला चल पड़ा है, जिस पर सरकार को सख्ती दिखानी चाहिए। लोगों को हंसाने, उन्हें बेहतर महसूस कराने, खुशी का माहौल बनाने के लिए अभद्र और आपत्तिजनक शब्द बोलने जरूरी नहीं हैं। अगर किसी कलाकार के पास लोगों को हंसाने का हुनर है तो वह शालीन शब्दों के जरिए भी ऐसा कर सकता है। गलत शब्द बोलकर तालियां बटोरने की हरकत इस बात का प्रमाण है कि वह शख्स कोई कलाकार नहीं है। अक्सर उनके पक्ष में यह कुतर्क दिया जाता है कि उन्हें बहुत लोग सुनते हैं, इसलिए आपत्ति नहीं जतानी चाहिए। लोगों को बुराई जल्दी आकर्षित करती है, इसलिए अभद्र कॉमेडी जल्दी मशहूर होती है। सोशल मीडिया ने ऐसे कथित स्टैंड-अप कॉमेडियन को कुछ ज्यादा ही 'महान' बना दिया है, जो द्विअर्थी संवाद बोलकर, अश्लीलता का रंग घोलकर लोगों को हंसाने की कोशिश करते हैं। उनके वीडियो बहुत वायरल होते हैं। इससे अन्य कॉमेडियन, जो रातोंरात मशहूर होना चाहते हैं, प्रेरणा लेते हैं और आपत्तिजनक शब्दों की बौछार शुरू कर देते हैं। अब तो इन लोगों ने अश्लीलता को जल्दी मशहूर होने का संक्षिप्त सूत्र मान लिया है। जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर आपत्ति जताता है, उसे इनके प्रशंसक यह कहकर चुप रहने की हिदायत देते हैं कि 'आपको यह सब पसंद नहीं है तो न देखें, हमें पसंद है, इसलिए हम देखेंगे।' क्या किसी गलत बात को इस आधार पर बढ़ावा देना सही है, क्योंकि उसे बड़ी संख्या में लोग पसंद करने लगे हैं? यह बहुत खतरनाक चलन है, जिसे रोका जाना चाहिए।

जिन्हें यह लगता है कि अभद्र और आपत्तिजनक शब्दों के बिना किसी को हंसाया ही नहीं जा सकता, उन्हें जसपाल भट्टी के 'फ्लॉप शो' और 'फुल टेंशन' जैसे शो जरूर देखने चाहिएं। ये नब्बे के दशक में इतने मशहूर हुए थे कि इन्होंने प्रसिद्धि के नए रिकॉर्ड बना दिए थे। आज भी ये यूट्यूब पर खूब देखे जाते हैं। इन्होंने साबित किया कि मर्यादित शब्दों, मर्यादित वेशभूषा और मर्यादित दृश्यों के साथ भरपूर हास्य उत्पन्न किया जा सकता है। जनता में ऐसे शो ज्यादा पसंद किए जाते हैं, क्योंकि लोग उन्हें अपने परिवार के साथ देख सकते हैं। वे सोशल मीडिया पर बेझिझक शेयर किए जा सकते हैं। इसलिए देश में अच्छे शो के देखे जाने की संभावना आज भी बहुत ज्यादा है। क्या वर्तमान कॉमेडियन ऐसे शो बना सकते हैं? कॉमेडी में आपत्तिजनक शब्दों का तड़का लगाने के पीछे, कुछ लोगों द्वारा एक वजह यह बताई जाती है कि 'इससे ऐसा लगता है कि कॉमेडियन आधुनिक सोच वाला इन्सान है।' ऐसा सोचना ही पूरी तरह गलत है। आधुनिकता का संबंध नई और अच्छी सोच से होता है। मर्यादाहीन और ओछी हरकतें करने से कोई आधुनिक नहीं बन जाता है। कोई कॉमेडियन आधुनिक कहलाना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने शो में ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी लोग बैठ सकें और सहज होकर हास्य का आनंद ले सकें। सिर्फ हंसा देना और तालियां बटोर लेना काफी नहीं है। कॉमेडियन को देश-दुनिया की विभिन्न समस्याओं का अपनी कला के जरिए समाधान पेश करना चाहिए। इससे लोग जागरूक होंगे। यह हकीकत है कि किसी जटिल मुद्दे को कॉमेडियन बड़ी आसानी से समझा सकता है। आज पर्यावरण प्रदूषण, नशाखोरी, साइबर अपराध जैसी बुराइयों का बोलबाला है। अगर कॉमेडियन मर्यादा में रहते हुए इन पर अपने तीखे शब्दबाण छोड़ें, राष्ट्रीय एकता का संदेश दें तो बहुत बड़ा सुधार हो सकता है।  

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