बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को उन्हें 'ताकतवर लॉबी, ठेकेदारों और कचरा माफिया का कमीशन एजेंट' बताया।
भाजपा नेता, शिवकुमार के उस आरोप का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि बेंगलूरु में कथित '39,000 करोड़ रुपए के कचरा प्रोसेसिंग घोटाले' में सत्ताधारी कांग्रेस पर 10,000 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाकर अशोक 'कचरा माफिया' के एजेंट की तरह बात कर रहे थे।
विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि अगर उनमें ज़रा भी पारदर्शिता बची है, तो वे कचरा टेंडर विवाद की जांच के लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट जारी करें।
अशोक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, 'डीके शिवकुमार, हां, मैं एक एजेंट के तौर पर बात कर रहा हूं। लेकिन आपकी तरह, मैं ताकतवर लॉबी, ठेकेदारों या कचरा माफिया का कमीशन एजेंट नहीं हूं। मैं जनता का एजेंट हूं – 7.5 करोड़ कन्नड़िगा और बेंगलूरु के 1.5 करोड़ नागरिकों की आवाज़, जिन्हें आपकी सरकार के भ्रष्टाचार, अक्षमता और कुशासन की कीमत चुकानी पड़ रही है।'
उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता के तौर पर घोटालों का पर्दाफ़ाश करना, संदिग्ध टेंडरों पर सवाल उठाना और सरकार को जवाबदेह ठहराना कोई विशेषाधिकार नहीं है – यह मेरा संवैधानिक कर्तव्य है। ऐसा करने के लिए मुझे किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है।'
अशोक ने कहा कि सालों की लॉबिंग, गुज़ारिश और कांग्रेस आलाकमान के दरवाज़े पर इंतज़ार करने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने पर, यह एहसास होना निराशाजनक हो सकता है कि कर्नाटक की जनता उन्हें 'हनीमून पीरियड' (शुरुआती राहत का समय) भी देने को तैयार नहीं है।
उन्होंने शिवकुमार से कहा, 'लेकिन विपक्ष पर उंगली उठाने से पहले शायद आपको अपनी पार्टी के भीतर देखना चाहिए। जब आपके अपने विधायक खुलकर असंतोष ज़ाहिर करते हैं, शिकायतें लेकर दिल्ली भागते हैं और सार्वजनिक रूप से आपके नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं, तो साफ़ है कि समस्या विपक्ष की नहीं है।'
विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री के उस दावे को कर्नाटक में हाल के समय का सबसे बड़ा राजनीतिक मज़ाक बताया, जिसमें कहा गया था कि विपक्ष, सरकार की पारदर्शिता और कामकाज को बर्दाश्त नहीं कर सकता।