पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सशस्त्र बलों द्वारा की गई कार्रवाई में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत होने की घटना ने फिर एक बार यह साबित कर दिया है कि इस पड़ोसी देश का 'कश्मीर और कश्मीरियत' से कोई संबंध नहीं है। जम्मू-कश्मीर में जो लोग पाकिस्तान के इशारों पर अलगाववाद का राग अलापते रहे हैं, उन्हें इस घटना की जानकारी जरूर होनी चाहिए। पीओके में सशस्त्र बलों के हाथों मारे गए लोग क्या मांग रहे थे? सस्ता आटा, सस्ती बिजली और महंगाई से थोड़ी राहत। इतनी-सी बात पर मुनीर के सिपाहियों ने उनकी लाशें बिछा दीं! पाकिस्तान किसी कश्मीरी का हमदर्द नहीं है। वह लोगों को भ्रमित करने के लिए एक मुद्दा ज़िंदा रखना चाहता है, इसलिए हर मंच से कश्मीर की रट लगाता रहता है। इस घटना से यह भी साबित हो गया कि जिन्ना ने जिस मजहबी राष्ट्र का सपना देखा था, वह धोखे के सिवा कुछ नहीं है। अगर वह सच होता तो आटा मांगने पर कत्ले-आम न होता। पाकिस्तान ने पीओके को बंधक बना रखा है। वह जनता को सिर्फ जज्बाती नारे दे सकता है। नौजवानों को बम-बंदूक थमा सकता है। वह भूखे पेट को रोटी नहीं दे सकता। घर-घर बिजली पहुंचाना उसके बस की बात नहीं है। किसी को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि ऐसी घटना भविष्य में नहीं होगी। आने वाले वर्षों में पीओके समेत पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में ऐसे नजारे देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इस पड़ोसी देश ने न तो बांध निर्माण की ओर ध्यान दिया, न खेती की उन्नत विधियां विकसित कीं, न किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराए और न कृषि शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कुछ किया।
अब तो पाकिस्तान में हर साल आटे के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। कई बार लोगों में भयंकर झड़पें तक हो जाती हैं। आटे की बोरी पर कब्जा करने की कोशिश में लोग जान गंवा चुके हैं। जबकि भारत में क्या हो रहा है? यहां अनाज के ढेर लगे हैं। खलिहान भरे पड़े हैं। जिसे जितना आटा चाहिए, उतना ले जाए। सरकार मुफ्त राशन दे रही है सो अलग। आटा, चावल, दाल, तेल, नमक, मिर्च, सब्जी ... किसी चीज की कोई कमी नहीं है। सोचिए, जो लोग एलओसी के इस पार यानी जम्मू-कश्मीर में हैं, वे कितने सौभाग्यशाली हैं! शुक्र मनाएं कि यहां तिरंगा लहरा रहा है, भारतीय सशस्त्र बल अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की रक्षा कर रहे हैं। जो लोग उस पार हैं या बहकावे में आकर उधर चले गए, आज उन्हें आटा मांगने पर दनादन गोलियां मिल रही हैं। सस्ती बिजली के बदले सांसें छीनी जा रही हैं। यह है पाकिस्तान का सच! जो मुल्क अवाम को रोटी नहीं दे सकता, सस्ती बिजली नहीं दे सकता, उस पर गोलियां बरसाता है, वह किसी और को क्या दे देगा? जो खुद नफरत में डूबा हुआ है, उसके पास दूसरों को देने के लिए क्या होगा? भारत में करोड़ों उपभोक्ताओं को नाम मात्र के शुल्क या मुफ्त में बिजली मिल रही है। केंद्र सरकार जिस तरह सौर ऊर्जा अपनाने पर जोर दे रही है, उससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि इस दशक के आखिर तक भारत बिजली उत्पादन में बड़ा कीर्तिमान रच देगा। यहां बिजली बहुत सस्ती हो जाएगी। हाल में पश्चिम एशिया में अशांति के कारण जब एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ दिक्कतें आईं तो घरों में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग बढ़ गया। अगर सबकुछ ठीक रहा तो भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम हो जाएगी। जो (अलगाववादी) इतनी उज्ज्वल संभावनाओं वाले देश के बजाय बदहाल पाकिस्तान के साथ अपना भविष्य देखता है, वह अपने और अपने परिवार के लिए बदहाली का सौदा करता है।