कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को सोशल मीडिया पर जो प्रसिद्धि मिली, वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कहीं दिखाई नहीं दी। यह कहना गलत नहीं होगा कि उसका पहला ही प्रदर्शन 'फ्लॉप शो' साबित हुआ। कहां तो ये दावे किए जा रहे थे कि देश का युवा सीजेपी को हाथोंहाथ लेगा, वह इसका झंडा उठाकर निकल पड़ेगा, लेकिन युवा तो आया ही नहीं! विरोध प्रदर्शन में वे ही चेहरे ज्यादा दिखाई दिए, जो 'किसान आंदोलन' से लेकर अन्य विरोध प्रदर्शनों में दिखाई देते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में आधी भीड़ तो यूट्यूबरों और उन लोगों की थी, जो फोटो-वीडियो लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट में कुछ जान डालना चाहते थे। हालांकि उन्हें निराश नहीं होना पड़ा। कई लोग ऐसे थे, जिन्हें यह तक नहीं पता था कि प्रदर्शन क्यों हो रहा है! वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगते दिखाई दिए, लेकिन जब उनसे मंत्री का नाम पूछा गया तो बगलें झांकने लगे। कुल मिलाकर न यह प्रदर्शन नया था, न इसके लोग नए थे। हां, कॉकरोच के मुखौटे जरूर नए थे, जो युवाओं को आकर्षित नहीं कर पाए। युवा समझ चुका है कि यह देश में अस्थिरता और हुड़दंग फैलाने की मंशा रखने वालों का जमघट है। वह इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता। वह कॉकरोच नहीं बनना चाहता। वह एक जिम्मेदार नागरिक बनना चाहता है। जो लोग इस प्रदर्शन में आए, उनमें से ज्यादातर दोपहर तक सेल्फी लेकर चलते बने! प्रदर्शन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए कोशिशें खूब हुईं। सोशल मीडिया पर महफिल जमी। ऐसा दिखाया गया कि अभिजीत दीपके कोई महान उद्धारक बनकर आ रहे हैं, जो एक छड़ी घुमाएंगे और सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
सीजेपी वालों की मंशा जरूर रही होगी कि दिल्ली पुलिस उन्हें विरोध प्रदर्शन की इजाजत न दे, ताकि उसके बाद उन्हें यह कहने का मौका मिले कि 'हमारी आवाज दबाई जा रही है' और वे पूरे देश में बवाल मचाते फिरें। पुलिस ने प्रदर्शन की इजाजत देकर उस दांव की हवा निकाल दी। कुछ लोगों के मन में यह सोचकर लड्डू फूट रहे थे कि इधर युवाओं का हुजूम उमड़ेगा, उधर पुलिस के हाथ-पांव फूलेंगे ... वह अभिजीत दीपके को शांति के लिए खतरा बताकर गिरफ्तार करेगी। अगर गिरफ्तार नहीं करेगी तो दिल्ली से बाहर जाने के लिए कह देगी और सीजेपी के पास यह कहने का बहाना होगा कि भारत में असहिष्णुता बढ़ गई है। ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके मन में फूट रहे लड्डू बाद में फीके निकले। जब ख़याली पुलावों के सहारे सुधार करने निकलते हैं तो ऐसा ही होता है। बड़ा सवाल है- सीजेपी सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी, उसे पूरा मौका दिया गया, वह शक्ति प्रदर्शन करने आई, लेकिन यह 'फ्लॉप शो' कैसे हुआ? दरअसल लोग सोशल मीडिया पर उभरने वाली हर चीज से कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा बैठते हैं। ये धरातल पर कमाल दिखा पाएं, यह जरूरी नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि युवाओं में आक्रोश है। पेपर लीक, धांधली, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं में नाराजगी है। जब वे सोशल मीडिया पर देखते हैं कि कुछ लोग पैसे और पहचान के दम पर गलत तरीके से आगे बढ़ रहे हैं, सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी है और भ्रष्ट अधिकारी बेलगाम हैं, पढ़ाई-लिखाई के बावजूद रोजगार नहीं मिल रहा है, परिवार और रिश्तेदारों से ताने सुनने पड़ रहे हैं सो अलग ... ऐसे में युवाओं के आक्रोश को भुनाने के लिए कोई मंच बनाया जाता है तो लोग उसकी ओर ध्यान देते हैं। यह स्वाभाविक है। वे भले ही उसके प्रदर्शन का हिस्सा न बनें, लेकिन मन में यह विचार रहता है कि शायद कुछ बेहतर हो जाए! यह सोचकर वे उसके सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ जाते हैं। सीजेपी के इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि देश के युवाओं को केंद्र सरकार से शिकायत जरूर है, वहीं उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही है। मोदी यह उम्मीद न टूटने दें। युवाओं की हर समस्या का समाधान होना चाहिए।