अगर ममता बनर्जी चाहें तो उन्हें रेजीनगर से विधानसभा भेज सकता हूं: हुमायूं कबीर

नरम पड़े हुमायूं के तेवर

Photo: @humayunaitc X account

कोलकाता/दक्षिण भारत। एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने गुरुवार को ममता बनर्जी को रेजीनगर से पश्चिम बंगाल विधानसभा में वापसी का रास्ता सुझाया। यह घटनाक्रम तृणकां से अलग होने और उनकी सरकार को सत्ता से हटाने का आह्वान करने के महीनों बाद सामने आया है।

कबीर, जिन्होंने साल 2026 के चुनावों में मुर्शिदाबाद ज़िले की नौदा और रेजीनगर, दोनों विधानसभा सीटें जीती थीं, ने कहा कि वे ममता बनर्जी की रेजीनगर से विधानसभा में वापसी में मदद करने के लिए तैयार हैं। चुनाव नियमों के अनुसार, उन्हें इन दोनों सीटों में से एक को छोड़ना होगा, जिसके बाद रेजीनगर में उपचुनाव होने की उम्मीद है।
 
कबीर ने पत्रकारों से कहा, 'अगर ममता बनर्जी मेरे पास आती हैं तो मैं उन्हें रेजीनगर से विधानसभा भेज सकता हूं। अगर वे नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं तो नहीं जीतेंगी। लेकिन अगर वे चाहें तो मैं इस्तीफ़ा दे दूंगा और अपने निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत सुनिश्चित करूंगा।'

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी और भवानीपुर सीट अपने पास रखी, जहां से उन्होंने बनर्जी को हराया था।

कबीर का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब तृणकां की चुनावी हार और उस बगावत के बाद बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही हैं, जिसने उनके द्वारा स्थापित 28 साल पुरानी पार्टी को ही तोड़कर रख दिया है। 

मुर्शिदाबाद के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में से एक कबीर के लिए ये टिप्पणियां एक उल्लेखनीय राजनीतिक बदलाव का संकेत हैं।

पिछले साल पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे टकराव के बाद तृणकां से निकाले जाने पर, कबीर ने 'आम जनता उन्नयन पार्टी' बनाई और तृणकां के सबसे कड़े आलोचकों में से एक बनकर उभरे। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर बार-बार हमले किए और उन्हें सत्ता से हटाने की मांग की थी।

अब जब तृणकां सत्ता से बाहर है और पार्टी के भीतर आए एक अभूतपूर्व संकट के बीच बनर्जी अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तब हुमायूं कबीर ने उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया है।

हुमायूं कबीर ने कहा, 'जिस स्थिति में वे आज हैं, उन्हें देखकर मुझे दुख होता है। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह उन्हीं की वजह से हूं। ... हो सकता है अब कोई उनकी बात न सुने, लेकिन रेजीनगर में हुमायूं कबीर की बात ही अंतिम मानी जाती है।'

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