आतंकवाद से झुलसा पाकिस्तान, अब जान बचाने के लिए अपनाएगा यह रणनीति

आतंकवादी घटनाओं में हुई जोरदार वृद्धि

Photo: ISPR

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। पाकिस्तान एक नई आंतरिक सुरक्षा नीति पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य आपराधिक डेटाबेस को एकीकृत करके और प्रांतों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था में सुधार लाकर आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाना है।

प्रस्तावित 'राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा नीति 2026-30' पर इस महीने के आखिर में 'राष्ट्रीय पुलिस प्रबंधन बोर्ड' (एनपीएमबी) की एक 'विशेष बैठक' में चर्चा की जाएगी, और इसमें सभी प्रांतीय पुलिस प्रमुखों की सिफारिशों को शामिल किया जाएगा।

'डॉन' अख़बार ने बताया कि इसमें पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में पुलिस प्रमुखों से मिले इनपुट भी शामिल होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रस्तावों में गिलगित-बाल्टिस्तान में एक आतंकवाद-रोधी विभाग की स्थापना, राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस डेटा का एकीकरण, प्रांतों के बीच बेहतर खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के उपाय शामिल हैं।

यह नीति देशव्यापी पुलिस सुधारों और सुरक्षा रणनीतियों को तैयार करने में राष्ट्रीय पुलिस ब्यूरो के लिए एक बड़ी भूमिका की परिकल्पना करती है। इस ब्यूरो का नेतृत्व वर्तमान में संघीय जांच एजेंसी के महानिदेशक उस्मान अनवर कर रहे हैं। 
 
मीडिया से बात करते हुए अनवर ने कहा कि विभिन्न नागरिक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच गंभीर तालमेल की कमी है। उन्होंने सभी प्रांतों में एक समान पुलिस व्यवस्था की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा, 'आतंकवाद से लड़ने और आतंकवादियों की फंडिंग को रोकने के लिए, सभी प्रांतों में एक समान व्यवस्था स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करना समय की सख्त ज़रूरत है।'
 
अनवर ने कहा कि आगामी बैठक में कार्यात्मक विशेषज्ञता, पुलिस कल्याण, सीमा-पार अपराध, आपराधिक डेटा एकीकरण, प्रशिक्षण आवश्यकताओं, महिला पुलिस नेटवर्किंग, अंतर-प्रांतीय खुफिया जानकारी साझा करने और गिलगित-बाल्टिस्तान में सीटीडी के विकास पर भी चर्चा की जाएगी।

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