पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल भगाने की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया का एक वर्ग उनके पक्ष में माहौल बनाने में जुट गया है। उससे प्रभावित होकर भारत में भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर घुसपैठ के मुद्दे पर नरम रुख अपना रहे हैं। यह भ्रम का जाल है। हमें इससे दूर रहना चाहिए। मीडिया का उक्त वर्ग ऐसी कहानियां दिखा रहा है, जो घुसपैठियों के साथ ज्यादा से ज्यादा उदारता बरतने की अपील करती हैं। एक घुसपैठिया कहता है कि वह बचपन में भारत आ गया था, क्योंकि मां-बाप उसे यहां ले आए थे। आज वह 38 साल का है। उसने यहीं शादी की थी। यहीं उसके बच्चे हुए। बच्चों की भी शादियां कर दीं। अब उसे बांग्लादेश जाने के लिए 'मजबूर' किया जा रहा है! क्या इन घुसपैठियों ने भारत आकर हम पर कोई उपकार किया है कि इन्हें आगे भी बर्दाश्त करें? अगर मां-बाप का हाथ पकड़कर भारत आए थे तो अब उन्हीं से सवाल पूछें- मुझे यहां क्यों लाए थे? क्या भारत सरकार ने यहां आकर शादी करने का न्योता भेजा था? यह कोई करुण कथा नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के ढीले रवैए का एक उदाहरण है। ये लोग बांग्लादेश से उठकर यहां आ जाते हैं। उसके बाद शादियां करते हैं। बच्चों को जन्म देते हैं। यहां के संसाधनों पर मौज करते हैं। जब सरकार इन्हें निकालती है तो अपनी समस्याएं गिनाने लगते हैं। क्या आपकी समस्याओं के लिए भारत सरकार या पश्चिम बंगाल सरकार जिम्मेदार है? जब बांग्लादेश बने लगभग साढ़े पांच दशक हो गए, वहां एक सरकार है, जनप्रतिनिधि हैं, अदालतें हैं, तो बांग्लादेशी नागरिक अपने अधिकार उनसे मांगें। अब वही पुरानी कैसेट न चलाएं कि बांग्लादेश जाकर क्या करेंगे, कहां रहेंगे? इन सवालों के जवाब बांग्लादेशी सरकार से लें, उसके प्रधानमंत्री से लें।
हाकिमपुर सीमा चौकी पर कई बांग्लादेशी महिला-पुरुष अपने बच्चों को लेकर जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को गोद और कंधों पर बैठा रखा है। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर कुछ लोगों को केंद्र सरकार और प. बंगाल सरकार को कोसने का सुनहरा मौका मिल गया है। वे इसे बच्चों के साथ अन्याय बता रहे हैं। वे सरकार पर निशाना साधने के बजाय इन घुसपैठियों से सवाल क्यों नहीं करते? क्या इन्होंने हमारे देश में अवैध ढंग से प्रवेश कर अपने ही बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया था? क्या इन्होंने उनके साथ अन्याय नहीं किया? शुक्र मनाएं कि भारत सरकार ने बहुत मानवता दिखाई है। अगर चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में पकड़े जाते तो लेने के देने पड़ जाते। कोई बांग्लादेशी नागरिक भारत में घुसपैठ करता है तो उसके साथ भविष्य में जो कानूनी कार्रवाई होगी, उसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। भारत सरकार और प. बंगाल सरकार को पूरा हक है कि वे घुसपैठियों की पहचान करें, उन्हें चेतावनी दें, जेल में डालें और देश से बाहर निकालें। उन्हें आज स्वदेश जाने का मौका दिया जा रहा है। इसका उन्हें आगे बढ़कर फायदा उठाना चाहिए। यह समझें कि अभी मुफ्त में छूट रहे हैं। अगर भविष्य में सख्ती हुई तो यह मौका हाथ से निकल जाएगा। उस सूरत में जेल जाने, सजा पाने की नौबत आ सकती है। बांग्लादेशी घुसपैठिए कोई मेहमान नहीं हैं कि इनके स्वागत-सत्कार के लिए हम पलक-पांवड़े बिछाएं। कुछ कथित बुद्धिजीवी इन घुसपैठियों को राशन, मकान, रोजगार जैसी सुविधाएं दिलाने के लिए अदालतों में चले जाते हैं। वे इतनी चिंता भारतीय नागरिकों की नहीं करते, जितनी घुसपैठियों की करते हैं। इनकी दलीलें बहुत चल गईं। अब सरकार को सख्ती बढ़ानी चाहिए।