नई दिल्ली/दक्षिण भारत। लाल किला कार धमाका मामले में एनआईए की जांच से एक चौंकाने वाली साज़िश का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने लखनऊ में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की योजना बनाई थी, जिसमें विधानसभा और ज़्यादा भीड़भाड़ वाली अन्य प्रमुख जगहों को निशाना बनाने की तैयारी थी। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि दो मुख्य आरोपी डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद ने इस आतंकी साज़िश के लिए एक 'सोची-समझी रेकी यात्रा' के तहत 25 से 30 अगस्त, 2025 के बीच हरियाणा के फ़रीदाबाद से लखनऊ तक का सफ़र किया था।
सूत्रों ने यह जानकारी दी कि मुज़म्मिल ने उत्तर प्रदेश में सरकार के प्रतीक माने जाने वाले विभिन्न ठिकानों की 'हॉस्टाइल रेकी' की। उसने विधानसभा, बापू भवन (सिविल सचिवालय) के आस-पास के इलाकों और इमामबाड़ा, लाल बाग तथा अमीनाबाद जैसी ज़्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी की।
आरोपियों को ये जगहें अपने मिशन के लिए उपयुक्त लक्ष्य लगीं। एक सूत्र ने बताया, 'वे इन बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स के पास विस्फोटकों से लदी एक कार में धमाका करने की योजना बना रहे थे।'
एनआईए की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी मुज़म्मिल ने अपने फ़ोन का इस्तेमाल करके लखनऊ में उन केमिकल दुकानों को खोजा, जहां 'ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड' बनाने के लिए ज़रूरी दो प्रीकर्सर केमिकल मिलते थे। बता दें कि यह एक बेहद अस्थिर पेरोक्साइड विस्फोटक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'मदर ऑफ़ सैटन' के नाम से जाना जाता है। इसी विस्फोटक का इस्तेमाल पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके में किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि मुज़म्मिल के निर्देश पर शाहीन ने इन संबंधित दुकानों के नाम अपनी लिखावट में लिख लिए थे। यह सूची बाद में एनआईए ने उसके फ़ोन से बरामद की। दोनों लखनऊ में शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर रुके। उन्होंने बताया कि शाहीन का पुश्तैनी घर, जहां उसके पिता अलग रहते हैं, लाल बाग के खंडारी बाज़ार में स्थित है।
सूत्रों के अनुसार, इसके बाद मुज़म्मिल ने एक 'गवाह' से कहा, जो लखनऊ का रहने वाला था और शहर से भली-भांति परिचित था, कि वह इन दुकानों पर जाकर खुद पता लगाए कि क्या वहां बड़ी मात्रा में ये रसायन उपलब्ध हैं?
उन्होंने बताया कि मुज़म्मिल ने इस गवाह को इसलिए अपने साथ मिलाया था, क्योंकि वह स्थानीय था और बिना किसी शक के पूछताछ कर सकता था। इसके विपरीत, मुज़म्मिल को तुरंत ही एक बाहरी व्यक्ति के तौर पर पहचाना जा सकता था।
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने शहर के किसी दूरदराज इलाके में एक ऐसी जगह भी तलाशी थी, जहां वे विस्फोटक बनाने की अपनी गतिविधियों को गुपचुप तरीके से अंजाम दे सकें, ठीक उसी तरह, जैसे वे फरीदाबाद के खोरी जमालपुर स्थित किराए के मकान में काम कर रहे थे।
एनआईए ने एक विस्तृत जांच के माध्यम से, जिसमें कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और तकनीकी विश्लेषण को शामिल किया गया, वित्तीय लेन-देन के सुरागों का पीछा करते हुए, लखनऊ की इस यात्रा के दौरान घटित हुईं घटनाओं के पूरे क्रम को स्थापित कर लिया है।