नई दिल्ली/दक्षिण भारत। चुनाव विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि भाजपा के राजनीतिक वर्चस्व का मौजूदा दौर, जो सन् 2014 में शुरू हुआ था, 'कम से कम 20 साल' तक चलने की संभावना है।
एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ पार्टी की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी, जब तक उसके शासन का प्रदर्शन काफ़ी कमज़ोर नहीं हो जाता।
कांग्रेस के लंबे समय तक रहे वर्चस्व से तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक बार फिर से 'एक-दलीय वर्चस्व' के दौर से गुज़र रही है।
प्रदीप गुप्ता ने कहा, 'राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने सन् 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन दिनों, हम एक ऐसी राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे जो लगभग 20 साल तक चलती थी। वह 20 साल का चक्र आज भी बना रहेगा।'
उनके विचार में, सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष, दोनों का भविष्य मौजूदा सरकार के प्रदर्शन पर बहुत हद तक निर्भर है।
उन्होंने कहा, 'इतना ज़बरदस्त जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए अब भाजपा और राजग को ज़बरदस्त प्रदर्शन करना होगा।'
उन्होंने कहा, 'जब तक उनका प्रदर्शन कमज़ोर या खराब नहीं हो जाता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।'
गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस को उन 'विरासत से जुड़े मुद्दों' का बोझ लगातार उठाना पड़ रहा है, जिन्हें अतीत के कुशासन से जुड़ी धारणाओं के रूप में बताया जाता है। इसके चलते उसकी राजनीतिक वापसी की प्रक्रिया और भी लंबी हो गई है।
उन्होंने कहा, 'अगर आप सन् 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा कि कांग्रेस करीब 15 साल तक सत्ता से बाहर रहेगी। मुझे लगता है कि पूरे देश को अपनी बात समझाने में उन्हें कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।'
इसके साथ ही, गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक वर्चस्व ने जनता की अपेक्षाओं को भी बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा, 'जब आप ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं तो बाद में नीचे आने की भी आशंका रहती है। भाजपा अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां उससे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।'