नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बढ़ती कीमतों, बेरोज़गारी, पेपर लीक, घटते निवेश और गिरते रुपए के मुद्दों को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब अर्थव्यवस्था संकट में है, तब भी मोदी अपना पीआर जारी रखे हुए हैं।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'मोदी चाहते हैं कि जनता उनके भाषणों की 'धुन' का आनंद ले, जबकि उनकी सरकार की 'लूट' से होने वाली 'तकलीफ़' को झेलती रहे।'
खरगे ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 11 सालों में, हर भारतीय पर औसत कर्ज़ 11 गुना बढ़ गया, वहीं दूसरी ओर, 229 बड़े उद्योगपतियों और 26 नए अरबपतियों की संपत्ति कथित तौर पर 97.50 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गई है।
खरगे ने कहा कि घरेलू एलपीजी की कीमत में 121% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो साल 2014 के 414 रु. से बढ़कर साल 2026 में 915.5 रु. तक पहुंच गई है। कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में बेरहमी से लगभग 154% की बढ़ोतरी की गई है, जो 1,241 रु. से बढ़कर 3,152 रु. हो गई है। सीएनजी, दूध, ब्रेड, दवाएं - हर चीज़ की कीमतें आसमान छू रही हैं!
खरगे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, पेट्रोल पर लगाए गए भारी टैक्स और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के ज़रिए नागरिकों से 43 लाख करोड़ रुपए से भी ज़्यादा की रकम वसूली गई है। हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों ने कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 12,400 करोड़ रुपए का मुनाफ़ा कमाया, जबकि आम परिवार कीमतों के लगातार बढ़ते दबाव के चलते दम घुटने जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
मार्च 2026 में युवाओं में बेरोज़गारी (15 से 29 वर्ष की आयु) बढ़कर 15.2% हो गई है, जो नौ महीनों का उच्चतम स्तर है और गहराते आर्थिक संकट को दर्शाता है। भाजपा शासन के 10 वर्षों में 90 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। लगभग 9 करोड़ युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया है!
खरगे ने कहा कि रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 96.90 पर पहुंच गया है, जो कि व्यावहारिक रूप से 'डैथ बेड' पर है! पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले दो महीनों में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 38 अरब डॉलर घट गया है, जिससे बाहरी सुरक्षा कवच कमज़ोर पड़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि इक्विटी बाज़ारों से कुल एफपीआई आउटफ़्लो 2026 में अब तक 2.2 लाख करोड़ रु. तक पहुंच गया है, जो कि पूरे साल 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रु. से पहले ही ज़्यादा है। आर्थिक कठिनाइयां थोपकर, भाजपा सरकार ने लगभग 80 करोड़ नागरिकों को 5 किलोग्राम राशन सहायता प्रणाली पर निर्भर बना दिया है। अर्थव्यवस्था का हर पहलू संकट में है, लेकिन मोदी अपना पीआर जारी रखे हुए हैं, नागरिकों को यह उपदेश देते हुए कि वे इस गंभीर आर्थिक तूफ़ान का बोझ अपने कंधों पर उठाएं!