कोलकाता/दक्षिण भारत। चुनावी झटके का सामना करने के बाद, तृणकां प्रमुख ममता बनर्जी ने हालिया विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवारों से संगठन को फिर से खड़ा करने का आग्रह किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।
कालीघाट आवास पर, तृणमूल कांग्रेस के चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों के साथ हुई एक बैठक में, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे, उन्होंने कहा कि करारी हार का सामना करने के बावजूद पार्टी फिर से उठ खड़ी होगी।
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा, 'जो लोग दूसरी पार्टियों में जा रहे हैं, उन्हें जाने दें। मैं पार्टी को फिर से नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने हुए हैं, उनसे मैं कहती हूं कि वे पार्टी के क्षतिग्रस्त दफ़्तरों को फिर से ठीक करें, उन्हें रंग-रोगन करें और फिर से खोलें। अगर ज़रूरत पड़ी, तो मैं भी उन्हें रंगूंगी। तृणमूल कांग्रेस कभी किसी के आगे नहीं झुकेगी। लोगों के जनादेश को लूटा गया है।'
हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में तृणकां को भारी हार का सामना करना पड़ा। वह सिर्फ 80 सीटें जीत पाई। ममता बनर्जी अपने गढ़ भवानीपुर से हार गईं।
तृणकां ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि दार्जिलिंग की पहाड़ियों में तीन सीटें अपने सहयोगी दल, अनित थापा के नेतृत्व वाले भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ दी थीं। इनमें से केवल 80 उम्मीदवार विजयी हुए, जबकि 211 को हार का सामना करना पड़ा। इनमें कई दिग्गज नेता और मंत्री भी शामिल थे।
कालीघाट में यह बैठक उन उम्मीदवारों के लिए बुलाई गई थी, जिन्होंने पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। यह बैठक चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरों और संभावित दलबदल की अटकलों के बीच आयोजित की गई।
इस बैठक में ममता बनर्जी की उन टिप्पणियों की ही गूंज सुनाई दी, जो उन्होंने नतीजों की घोषणा के एक दिन बाद की थीं। 5 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि कुछ नेता पाला बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है कि कई लोग दूसरी पार्टियों में चले जाएंगे। उनकी अपनी मजबूरियां हो सकती हैं। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। जो कोई भी जाना चाहता है, वह जा सकता है। मैं किसी को ज़बरदस्ती रोककर रखने में विश्वास नहीं रखती।'