नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के 'नेतृत्व संकट, दूरदृष्टि की कमी और अक्षमता' के कारण देश में आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि यह संकट सरकार द्वारा पैदा किया गया संकट है, जिसके नतीजों को देश की जनता पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी पर अपनी जेब से भुगत रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, 'देश की जनता को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय ईंधन संकट के साथ-साथ, इस समय भारत में आर्थिक संकट का मुख्य कारण मोदी सरकार का नेतृत्व संकट, दूरदृष्टि का अभाव और घोर अक्षमता है।'
खरगे ने कहा कि जब डीज़ल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका पूरे देश में महंगाई पर एक व्यापक असर पड़ता है, जिससे उद्योगों से लेकर घरेलू बजट और किसानों तक हर कोई बुरी तरह प्रभावित होता है।
जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा, तो देश को बताया गया कि 'सब ठीक है' और कांग्रेस के सवालों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके बजाय, हमारी संप्रभुता को अमेरिकी 'अनुमति' के लिए गिरवी रख दिया गया।
उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान, मोदी सरकार ऐसे बर्ताव करती है मानो 'सब कुछ सामान्य' हो, और केंद्र सरकार की एकमात्र ज़िम्मेदारी राज्यों के चुनाव लड़ना हो। अब, जैसे-जैसे संकट गहरा रहा है, मोदी ने 'वर्क फ्रॉम होम' और ईंधन बचाने जैसे विचारों का प्रचार करना शुरू कर दिया है।
खरगे ने कहा कि अमेरिका ने मार्च में रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई 30 दिन की छूट का ज़िक्र करते हुए इजाज़त और अनुमति जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा, 'रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार अब उस छूट की समय सीमा बढ़ाना चाहती है। सवाल यह है कि मोदी देश को ऐसी स्थिति में क्यों ले आए हैं, जहां उसे 'अनुमति' मांगनी पड़ रही है?'
खरगे ने कहा, 'क्या यह सच नहीं है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब मोदी सरकार ने आम जनता को कोई राहत नहीं दी, बल्कि इसके बजाय 10 वर्षों में केंद्रीय करों से 43 लाख करोड़ रुपए कमाए? तो फिर, अब जनता पर महंगाई का बोझ क्यों डाला जा रहा है?'