सादगी की अपील: राहुल गांधी पर भाजपा का पलटवार, नेहरू के भाषण का दिया हवाला

नेहरू का एक पुराना कथित वीडियो भी शेयर किया

फोटो: संबंधित पार्टियों के फेसबुक पेज से।

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। भाजपा ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री की 'सादगी' की अपील की आलोचना करना गलत है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति सिर्फ सत्ता तक ही सीमित रही है, देश के निर्माण पर उसका कोई ध्यान नहीं रहा।

भाजपा की यह प्रतिक्रिया तब आई, जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके उन बयानों को लेकर हमला बोला, जिनमें उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के असर से निपटने के लिए नागरिकों को कुछ उपाय सुझाए थे और कहा कि 'समझौता कर चुके' प्रधानमंत्री अब देश चलाने में सक्षम नहीं हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री के शब्द 'विफलता का सबूत' थे।

एक्स पर एक पोस्ट में, भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि मोदी ने लोगों से त्याग करने के लिए नहीं कहा है, बल्कि उनसे राष्ट्रीय हित में सोच-समझकर चुनाव करने का आग्रह किया है, जैसे ऊर्जा बचाना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, विदेशी मुद्रा बचाना और आत्मनिर्भरता को मज़बूत करना।

उन्होंने कहा, 'लेकिन कांग्रेस की समस्या ठीक यही है। राष्ट्रीय हित में जनता की भागीदारी की कोई भी अपील उन्हें 'उपदेश' जैसी लगती है, क्योंकि उनकी राजनीति सत्ता तक ही सीमित रही है, राष्ट्र-निर्माण तक नहीं।'

पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव का ज़िक्र करते हुए मालवीय ने कहा कि हर वैश्विक संकट पूरी दुनिया को प्रभावित करता है, और राहुल गांधी के हमले का जवाब देने के लिए उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का हवाला दिया।

उन्होंने पूछा, 'अगर जनता से अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की अपील करना 'नाकामी' माना जाता है, तो क्या आपके प्रिय नेहरू भी एक 'समझौतावादी प्रधानमंत्री' थे?'
 
मालवीय ने कहा, 'नेहरू ने खुद कहा था कि जब दूसरे देशों में युद्ध छिड़ते हैं, तो उनका असर भारत में महंगाई के रूप में महसूस होता है। तो क्या वह भी उस समय एक 'बहाना' था, या उस समय इसे एक ज़िम्मेदार नेतृत्व माना गया था?'

उन्होंने नेहरू का एक पुराना कथित वीडियो भी शेयर किया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जब कोरिया या अमेरिका जैसे देशों में युद्ध होते हैं, तो उसका असर देश पर भी पड़ता है।
 
उन्होंने कहा कि ज़िम्मेदार नेतृत्व लोगों को सच बताता है और चुनौतियों का सामना करने में सामूहिक भागीदारी की अपील करता है।

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