इस्तीफे से इन्कार, विधानसभा भंग ... अब ममता बनर्जी का क्या होगा?

ममता बनर्जी ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाया

Photo: MamataBanerjeeOfficial FB Page

कोलकाता/दक्षिण भारत। राज्यपाल आरएन रवि ने पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद 7 मई को उसे भंग कर दिया। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है।

वर्तमान विधानसभा का गठन मई 2021 में तब हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी।

हाल में संपन्न हुए दो-चरणों वाले चुनावों के बाद, इस विधानसभा के विघटन के साथ ही निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। यह अधिसूचना संसदीय कार्य विभाग द्वारा जारी की गई।
 
विधानसभा के भंग होने के साथ ही राज्य मंत्रिमंडल का अस्तित्व भी समाप्त हो गया, जिससे प्रभावी रूप से मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी का कार्यकाल समाप्त हो गया।

हालांकि, आम चलन से हटते हुए, ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी तृणकां की भाजपा के हाथों हार के बाद इस्तीफ़ा देने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया गया।

बनर्जी ने ने दावा किया कि उन्हें और उनकी पार्टी को 'हेरफेर' के ज़रिए हराया गया।

संविधान का अनुच्छेद 174 राज्यपाल को विशिष्ट प्रावधानों के तहत विधानसभा को आहूत करने का अधिकार प्रदान करता है। यह राज्य विधानमंडलों के सत्रों, सत्रावसान और विघटन को विनियमित करता है।
 
भाजपा ने 207 सीटें जीतकर 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया। राज्य में तृणकां का 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। ममता की पार्टी 80 सीटों पर सिमट गई। 

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