ईरान ने शांति वार्ता को लेकर अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा

ईरान युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था

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लाहौर/दक्षिण भारत। ईरान ने शांति वार्ता पर बने गतिरोध को तोड़ने के प्रयास में वॉशिंगटन को एक 'बहु-स्तरीय प्रस्ताव' भेजा है। इस घटनाक्रम से परिचित एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह बात कही।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव से वे अब भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वॉशिंगटन ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की पुख्ता गारंटी शामिल न हो।

ईरान युद्ध, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था, 8 अप्रैल से रुका हुआ है और तब से इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर हो चुका है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बातचीत में एक बड़ी अड़चन बना हुआ है, जहां ईरान युद्धविराम के हिस्से के तौर पर तेल की वैश्विक ढुलाई के इस अहम रास्ते को फिर से खोलने का प्रस्ताव दे रहा है, वहीं अमेरिका इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी भी समझौते में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा ज़रूर शामिल होना चाहिए।

अधिकारी ने बताया कि ईरान का नया प्रस्ताव तनाव कम करने का एक चरणबद्ध ढांचा है, जिसका मकसद तत्काल संघर्ष प्रबंधन को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे ज़्यादा जटिल और लंबे समय से चले आ रहे विवाद से अलग करना है।

उन्होंने कहा, 'योजना का पहला हिस्सा तनाव कम करने के लिए तत्काल उपायों पर केंद्रित है। ईरान ने रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आसपास तनाव कम करने की इच्छा जताई है, बशर्ते वॉशिंगटन भी अपनी सैन्य मौजूदगी कम करके और आर्थिक दबाव, जिसमें ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां भी शामिल हैं, में ढील देकर इसका जवाब दे।'

अधिकारी का मानना ​​है कि तेहरान ठोस बातचीत में उतरने से पहले विश्वास-निर्माण के कदमों को अनिवार्य मानता है।

उन्होंने कहा, 'दूसरी बात यह है कि ईरान समुद्री व्यापार और तेल के प्रवाह की बहाली को परमाणु वार्ताओं से अलग करने की कोशिश कर रहा है; उसका तर्क है कि उसकी परमाणु गतिविधियों से जुड़ी किसी भी बाध्यकारी प्रतिबद्धता से पहले आर्थिक सामान्यीकरण होना चाहिए।'

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