कोलकाता/दक्षिण भारत। पश्चिम बंगाल में एक महीने से ज़्यादा समय तक चली ज़ोरदार चुनावी मुहिम के बाद सोमवार को फ़ैसले का दिन है। राज्य बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है कि क्या तृणकां सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी या फिर भाजपा कोई ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करते हुए पहली बार यहां सत्ता पर काबिज़ होगी।
जैसे ही सुबह 8 बजे ईवीएम खुलेंगी, सीपीआई(एम) और कांग्रेस दोनों उतनी ही बेसब्री से नतीजों का इंतज़ार करेंगी। साल 2021 के चुनावों में पूरी तरह से सफ़ाया हो जाने और पांच साल तक हाशिए पर रहने के बाद, अब वे राज्य के चुनावी नक्शे में अपनी खोई हुई जगह वापस पाने की उम्मीद कर रही हैं।
राज्यभर के 77 केंद्रों पर वोटों की गिनती होगी, जिसके लिए सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। वहीं, ज़ोरदार राजनीतिक माहौल 294 सीटों वाले सदन की 293 सीटों के नतीजों की घोषणा के लिए मंच तैयार कर रहा है।
चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना ज़िले के पूरे फलता निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव रद्द कर दिए और इसका कारण बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना बताया।
उस सीट पर दोबारा मतदान और मतगणना क्रमशः 21 मई और 24 मई को होंगे। राज्य में दो चरणों में हुए चुनाव 29 अप्रैल को समाप्त हो गए, जिसमें आज़ादी के बाद से राज्य में अब तक की सबसे ज़्यादा 92.47 प्रतिशत वोटिंग हुई।
अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण 24 परगना के 15 बूथों पर शनिवार को पुनर्मतदान संपन्न हो गया, जिसमें लगभग 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्य का राजनीतिक माहौल काफी तीखा बना रहा, जिससे नतीजों की घोषणा से पहले लोगों में ज़बरदस्त उत्सुकता है। वहीं दोनों मुख्य दावेदार— तृणकां और भाजपा—अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने का दावा कर रही हैं।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते, जिसमें ज़मीन पर 2.5 लाख से ज़्यादा केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवान तैनात थे, और साथ ही राज्य पुलिस बल में भी पूरी तरह से फेरबदल किया गया था, चुनावी हिंसा न्यूनतम स्तर पर रही और पिछले कुछ दशकों के राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी की मौत की कोई खबर नहीं आई।