इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने किन्नर समुदाय के सदस्यों द्वारा मांगलिक अवसरों पर बधाई या नेग मांगे जाने की प्रथा के बारे में अत्यंत महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया है। किन्नरों के पास ऐसा कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसके तहत वे किसी से जबर्दस्ती रुपए या तोहफे मांग सकें। हाल के वर्षों में ऐसे मामले काफी चर्चा में रहे हैं, जब किन्नर समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा लोगों से अभद्रता की गई। कई बार तो ऐसी मांगें अप्रिय घटनाओं का रूप ले लेती हैं। पिछले साल मार्च में एक मामला देशभर में काफी चर्चा में रहा था, जब मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में चलती ट्रेन में किन्नरों के समूह ने एक युवक को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार डाला था। युवक का अपराध सिर्फ इतना था कि उसने किन्नरों को रुपए नहीं दिए थे। कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई यूं ही किसी को क्यों दे? क्या किन्नर समुदाय का सदस्य होने मात्र से किसी को यह अधिकार मिल जाता है कि वह दूसरों की कमाई में अपना हिस्सा मांगे? कई जगह किन्नरों की हरकतें मर्यादा को पार चुकी हैं। जब कोई व्यक्ति उन्हें शालीनतापूर्वक मना करता है तो उससे अभद्रता करते हैं। उसके आपत्ति जताने पर धमकाते हैं, अश्लील संकेत करते हैं। अगर किन्नरों का पूरा झुंड होता है तो उस व्यक्ति पर हावी होने की कोशिश करते हैं। क्या यह ज्यादती नहीं है? किसी व्यक्ति को क्या अधिकार है कि वह दूसरों से ऐसा व्यवहार करे? यह सब बंद होना चाहिए। किन्नर भी इन्सान हैं। उन्हें गरिमापूर्वक जीवन जीने और कमाने का अधिकार है। इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता, लेकिन उनमें से जो सदस्य रुपए-तोहफे मांगने के लिए मनमानी पर उतर आता है, वह सरासर गलत है।
सिर्फ इस आधार पर कि किन्नर समुदाय के लोग वर्षों से बधाई या नेग मांगते आ रहे हैं, यह उनका कानूनी अधिकार नहीं हो जाता है। लोग अपनी खुशी से कुछ दे देते हैं, यह अलग बात है। इस तथ्य को आधार बनाकर लोगों पर धौंस जमाने को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इससे टकराव बढ़ता है। कई बार भयानक नतीजे निकलते हैं। कुछ साल पहले पश्चिम बंगाल के मालदा जिले का एक मामला सुर्खियों में रहा था। वहां किन्नरों ने एक नवजात को करीब तीन घंटे तक अपने पास रखा और ढोल बजाते रहे। वे इस बात पर अड़ गए थे कि मोटी रकम मिलेगी, तो ही बच्चा वापस देंगे। बच्चे के माता-पिता उनकी मांग पूरी नहीं कर सकते थे। इस दौरान बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में किन्नर समुदाय के सदस्यों ने एक परिवार से नेग मांगने के नाम पर बहुत अभद्रता की। जब परिवार ने मांगी गई रकम देने से इन्कार किया तो किन्नर नहीं माने। वे अश्लील हरकतें करने लगे। आखिर में पांच हजार रुपए लिए और महिला की सोने की बाली उतरवा ली। जयपुर के सिंधी कैंप इलाके में एक युवक बस से उतरा। अचानक एक किन्नर ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया। उसने युवक की जेब से रुपए निकाल लिए। क्या यह लूट-खसोट नहीं है? युवक ने दूसरी जेब में भी कुछ रुपए रखे थे। अगर वे किन्नर की भेंट चढ़ जाते तो उसके पास किराया तक न बचता। कई ट्रेनों में किन्नरों की खूब मनमानी चलती है। अगर कोई व्यक्ति उन्हें रुपए देने से इन्कार करता है तो उसे जमकर खरी-खोटी सुनाते हैं और अपमानित करते हैं। क्या टिकट लेने के बाद ट्रेन में ऐसा अनुभव होना उस यात्री के अधिकारों का हनन नहीं है? इस संबंध में रेलवे प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिएं। किन्नर समुदाय के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है कि वे अन्य लोगों की तरह कोई हुनर सीखें और अपना कामकाज करते हुए सम्मानजनक तरीके से जीवन बिताएं। किसी को परेशान न करें।