कितने खरे उतरेंगे एग्जिट पोल?

क्या बंगाल में खिलेगा 'कमल'?

चुनाव नतीजों के ज्यादा नजदीक रहने वाले एग्जिट पोल की विश्वसनीयता बढ़ेगी

केरल, असम, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल ने कई नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वैसे तो ये महज अनुमान हैं, लेकिन इनसे हवा के रुख का कुछ हद तक पता चल जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा में पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल हैं, जहां तृणकां और भाजपा में जबर्दस्त टक्कर दिखाई दे रही है। कुछ एग्जिट पोल तृणकां के, वहीं कुछ भाजपा के मजबूत प्रदर्शन का अनुमान लगा रहे हैं। दोनों पार्टियां खुद की जीत को लेकर बड़ा दावा कर रही हैं। यह स्वाभाविक है। इस बार प. बंगाल में जैसा चुनावी माहौल था, जिस तरह रिकॉर्ड मतदान हुआ, उसके आधार पर यह अनुमान लगाना गलत नहीं होगा कि जिस पार्टी को जनता-जनार्दन का आशीर्वाद मिलेगा, भरपूर ही मिलेगा। जो जीतेगा, वह भारी बहुमत से जीतेगा। जो हारेगा, वह करारी शिकस्त चखेगा। अगर प. बंगाल में भाजपा 'कमल' खिलाने में कामयाब रही तो उसके कार्यकर्ताओं का जोश दुगुना हो जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय नेतृत्व की क्षमता पर भरोसा बढ़ेगा। इसका संदेश दूर तक जाएगा। इससे भाजपा और राजग को आगामी लोकसभा चुनावों में मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। साथ ही, विपक्ष के लिए 'खतरे की घंटी' होगी कि उसके तमाम आरोपों को जनता ने नकार दिया। भाजपा का विस्तार होने के द्वार खुलेंगे। उस स्थिति में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी। अगर प. बंगाल में फिर एक बार तृणकां की सरकार आ गई तो ममता बनर्जी का सियासी कद बढ़ेगा। इससे यह संदेश जाएगा कि भाजपा को टक्कर देने का दम सिर्फ तृणकां में है। विपक्ष में यह मांग तेज हो सकती है कि आगामी लोकसभा चुनाव ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ा जाए। प. बंगाल में तृणकां की जीत से विपक्ष को नई ऊर्जा मिल सकती है।

असम में हिमंत बिस्वा सरमा के आक्रामक चुनाव अभियान की झलक एग्जिट पोल में भी दिखाई दे रही है। उनमें सीटों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है, लेकिन इस बिंदु पर सभी एकमत हैं कि भाजपा की सरकार बन सकती है। एग्जिट पोल से केरल में यूडीएफ, तमिलनाडु में द्रमुक और पुड्डुचेरी में भाजपा उत्साहित है। हाल के वर्षों में एग्जिट पोल कई बार सही तो कई बार गलत साबित हुए हैं। साल 2022 में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में एग्जिट पोल काफी हद तक सही साबित हुए थे। साल 2023 में छत्तीसगढ़ में कांटे की टक्कर का अनुमान था, लेकिन भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसी साल मध्य प्रदेश में सीटों का अनुमान सटीक नहीं रहा था। राजस्थान में भाजपा की जीत का अनुमान सही साबित हुआ था। साल 2024 में हरियाणा में एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। उनमें कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगाया गया था, जबकि नतीजों में भाजपा अपनी सत्ता बचाने में सफल रही थी। झारखंड और महाराष्ट्र में एग्जिट पोल सही साबित हुए थे। दिल्ली में भी पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे एग्जिट पोल से कुछ अलग रहे थे। आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा था, जैसा एग्जिट पोल में दावा किया गया था। साल 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों ने भी एग्जिट पोल करने वालों को तगड़ा झटका दिया था। वास्तव में, जब एग्जिट पोल के लिए डेटा लिया जाता है तो हर व्यक्ति सही-सही जानकारी नहीं देता। जिस इलाके से डेटा लिया जाता है, उसमें कुल जनसंख्या के थोड़े-से हिस्से को शामिल किया जाता है। कई लोग बताते कुछ और हैं, वोट कहीं और दे आते हैं। अपने एसी-कक्ष में बैठकर डेटा विश्लेषण के आधार पर सीटों का अनुमान लगाने वाले 'बुद्धिजीवी' उस समय हैरान रह जाते हैं, जब नतीजे कुछ और आते हैं। जनता के मन की थाह पाना इतना आसान नहीं है। जो एग्जिट पोल चुनाव नतीजों के ज्यादा नजदीक रहेगा, उसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी। बाकी सबके अनुमान मीम बनाने के काम आएंगे।

About The Author: News Desk