हरदोई/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जैसे माँ गंगा हजारों वर्षों से उप्र की और इस देश की जीवनरेखा रही हैं, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके समीप से गुजरता यह एक्सप्रेस-वे उप्र के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे खुशी है कि उप्र सरकार ने इस एक्सप्रेस-वे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा है। इसमें विकास का हमारा विजन भी झलकता है और हमारी विरासत के भी दर्शन होते हैं। मैं उप्र के करोड़ों लोगों को गंगा एक्सप्रेस-वे की बधाई देता हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह-सात दशक में जो नहीं हुआ, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी, वैसे निर्भीक वातावरण में बंगाल में इस बार मतदान हो रहा है। लोग भयमुक्त होकर वोट दे रहे हैं। यह देश के संविधान और देश के मजबूत होते लोकतंत्र का पुण्य प्रतीक है। मैं बंगाल की जनता का आभार व्यक्त करता हूं कि वह अपने अधिकार के प्रति इतनी सजग है और बड़ी संख्या में मतदान कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोकतंत्र के उत्सव का भी एक अहम दिन है। बंगाल में इस समय दूसरे चरण का मतदान हो रहा है और जो खबरें आ रही हैं, उससे पता चलता है कि बंगाल में भारी मतदान हो रहा है। पहले चरण की तरह ही जनता वोट देने के लिए बड़ी संख्या में घरों से निकल रही है, लंबी-लंबी कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ समय पहले, जब बिहार में चुनाव हुए तो भाजपा-राजग ने प्रचंड जीत दर्ज की थी, एक इतिहास रच दिया था। अभी कल ही गुजरात में महानगर पालिका, नगर पालिका, जिला पंचायतें, नगर पंचायतें, तहसील पंचायत ... इन सब के चुनाव के नतीजे आए हैं। 80 से 85 प्रतिशत नगरपालिका और पंचायत भाजपा ने जीत ली हैं। मुझे विश्वास है कि इन पांच राज्यों के चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक जीत की हैट्रिक लगाने जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 4 मई के नतीजे विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेंगे। देश के विकास की गति को नई ऊर्जा से भरेंगे। कुछ ही दिन पहले मुझे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला था। तब मैंने कहा था कि ये नए बनते एक्सप्रेसवे विकसित होते भारत की हस्तरेखाएं हैं, और ये आधुनिक हस्तरेखाएं, आज भारत के उज्ज्वल भविष्य का जयघोष कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वो दौर चला गया, जब एक सड़क के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ता था। एक बार घोषणा हो गई तो वर्षों तक फाइलें चलती थीं। चुनाव के लिए पत्थर लग जाते थे, उसके बाद सरकारें आती-जाती रहती थीं, लेकिन काम का कुछ अता-पता नहीं लगता था। कभी-कभी पुरानी फाइलें ढूंढ़ने के लिए बड़े-बड़े अफसरों को दो-दो साल तक मेहनत करनी पड़ती थी। डबल इंजन सरकार में शिलान्यास भी होता है और तय समय में लोकार्पण भी होकर रहता है। गंगा एक्सप्रेसवे उप्र के एक छोर को दूसरे छोर से तो जोड़ता ही है। यह एनसीआर की असीम संभावनाओं को भी करीब लाएगा।