दिल्ली में एक आईआरएस अधिकारी की बेटी की हत्या के मामले में हो रहे खुलासे हैरान करने वाले हैं। गिरफ्तार आरोपी एक प्रतिभाशाली छात्र रहा है, लेकिन उसे ऑनलाइन जुए की ऐसी लत लगी, जिसके बाद उसने अपराध की दुनिया में प्रवेश किया। उसे अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं हो रहा है। जुआ किसी मनुष्य की बुद्धि किस तरह भ्रष्ट कर देता है, यह इसका एक उदाहरण है। आमतौर पर जुआरी अपनी आपबीती किसी को आसानी से नहीं बताते। अब सोशल मीडिया पर ऐसे लोग अनुभव साझा करने लगे हैं। उन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। देश में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है, जो जुए के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस चुके हैं। उनके सिर पर यही फितूर सवार रहता है कि 'किसी तरह रुपए मिल जाएं, उनसे और बड़ा दांव लगाएं।' उक्त युवक द्वारा भी आईआरएस अधिकारी के घर से रुपए-जेवरात चोरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह युवक इन अधिकारी के घर में नौकरी कर चुका है। इस दौरान उसने कई लोगों से रुपए उधार लेकर जुआ खेला था। जब अधिकारी को उसके कारनामों का पता चला तो नौकरी से निकाल दिया। यह युवक अपने घर में भी लड़ाई-झगड़ा करता था और जुआ खेलने के लिए रुपए मांगता था। अगर रुपए नहीं मिलते थे तो घर का सामान बेच देता था। जब जुए में रुपए जीतता था तो उन्हें अनैतिक कार्यों में उड़ा देता था। अगर जुए के इस रोग को फैलने से नहीं रोका गया तो भविष्य में कई लोग अपराध के दलदल में फंस सकते हैं।
अक्सर कहा जाता है कि 'जुआ संबंधी वेबसाइटों और ऐप्स के लिए सरकार जिम्मेदार है ... वह इन्हें बंद क्यों नहीं कर देती?' सरकार ने पूर्व में ऐसी कई वेबसाइटों और ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है। इनके हर प्लेटफॉर्म पर नजर रखना संभव नहीं है और न ही हर बात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित है। क्या लोगों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? इस तथ्य से सभी अवगत हैं कि जुआ खेलना बहुत बुरी बात है। फिर क्यों खेलते हैं? इससे दूर रहें। अगर आदत लगाना चाहते हैं तो अच्छी बातों की क्यों नहीं लगाते? क्या उसके लिए भी सरकार जिम्मेदार है? जुए की लत ने कई युवाओं की जिंदगी तबाह कर दी। दिल्ली में ही एक लड़का जो कुछ साल पहले टॉपर था, आज जुए के कारण लाखों रुपए के कर्ज में है। उसने शुरुआत में बहुत रुपए जीते थे। एक दिन भाग्य ने ऐसा पलटा खाया कि सबकुछ हार गया। उसने वह रकम दोबारा हासिल करने के लिए अपने माता-पिता के बैंक खातों में सेंध लगाई। वहां से लाखों रुपए उड़ाए। उनसे जुआ खेला और हार गया। उसकी पढ़ाई-लिखाई चौपट हो गई। जिस कॉलेज ने उसे सम्मानपूर्वक प्रवेश दिया था, उसी ने बाहर कर दिया। माता-पिता कॉलेज प्रबंधन के आगे हाथ जोड़ने लगे कि हमारे बेटे को न निकालें। जिस बेटे पर उन्हें गर्व था, उसकी गलत आदतों की वजह से दूसरों के सामने हाथ जोड़ने पड़े! एक और युवक को जुए की ऐसी लत लगी कि सबकुछ हारने के बाद वह दूसरों से रुपए उधार मांगने लगा। उसे किसी से भी रुपए मांगने में बिल्कुल झिझक नहीं होती थी। एक दिन उसकी महिला मित्र की दादी का निधन हो गया। जब फोन पर युवक को बताया तो उसने दु:ख जताने के बजाय महिला से कहा, 'दादी के कमरे में जाओ। अगर वहां कुछ रुपए मिल जाएं तो मुझे भेज दो।' जुए ने उसे इतना संवेदनाशून्य बना दिया। हर माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को जुए से सावधान करें और इस बुरे खेल से दूर रखें। अगर बच्चे इस भंवर में फंस गए तो पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचेगा।