कोलकाता/दक्षिण भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण में, गुरुवार को 152 सीटों पर मतदान शुरू हो गया। यह मतदान अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच हो रहा है और इसे एक बेहद अहम मुकाबला माना जा रहा है, जो पूरे चुनाव की दिशा तय कर सकता है।
सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ, जिसमें उत्तर में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी से लेकर दक्षिण में मुर्शिदाबाद, नदिया, बीरभूम और हुगली तक के ज़िलों में बूथों के बाहर मतदाताओं की कतारें लग गईं।
पहले चरण में राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से आधे से ज़्यादा सीटें शामिल हैं। इसे भाजपा के लिए शुरुआती बढ़त बनाने का सबसे अच्छा मौका और तृणमूल कांग्रेस के लिए लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश में सबसे अहम परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जिनमें लगभग 1.75 करोड़ महिलाएं और 465 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल हैं।
चुनावों के लिए पूरे राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,450 कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें लगभग 2.5 लाख जवान शामिल हैं। वहीं, 8,000 से अधिक मतदान केंद्रों को 'अत्यधिक संवेदनशील' के रूप में चिह्नित किया गया है।
चुनाव आयोग ने मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, कूच बिहार, बीरभूम और पुरबा बर्धमान जैसे ज़िलों को विशेष निगरानी में रखा है।
हिंसा को रोकने और स्वतंत्र व निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 2,193 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल, निगरानी इकाइयां और उड़न दस्ते भी तैनात किए गए हैं।
पहले चरण का राजनीतिक महत्त्व इसलिए है, क्योंकि इसमें उत्तरी बंगाल की सभी 54 सीटें शामिल हैं। यह वही क्षेत्र है जिसने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के उभार को गति दी थी और साल 2021 के विधानसभा चुनावों में उसे तृणकां के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरने में मदद की थी।