परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांचना बहुत जिम्मेदारी का काम होता है। अगर कोई शिक्षक इसमें लापरवाही बरतता है तो वह कई छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करता है। कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभा रहे हैं। उनकी हरकतें सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं। महाराष्ट्र में एक शिक्षक ढाबे पर नशा करते हुए उत्तर पुस्तिकाएं जांचता पाया गया, जिसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। किसी ने उसका वीडियो बना लिया था, इसलिए उसकी हरकत का पर्दाफाश हो गया। सोचिए, अगर उसका वीडियो सामने नहीं आता तो वह नशे में डूबकर कितने बच्चों के साथ अन्याय करता? शिक्षक का आचरण हमेशा आदर्श होना चाहिए। उसे देखकर छात्रों और समाज के अन्य लोगों को प्रेरणा मिलनी चाहिए। दुर्भाग्य से, आज कुछ शिक्षक अपने पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। अगर कोई शिक्षक नशाखोरी में डूबा हुआ है तो वह अपने छात्रों को क्या शिक्षा देगा? उसके शब्दों में सत्य का कितना बल होगा? उसे शिक्षक बनने के बजाय कुछ और बनना चाहिए। ऐसे शिक्षक उन शिक्षकों की प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहे हैं, जो सत्यनिष्ठा से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। हाल के वर्षों में उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के काम में लापरवाही बरतने के भी कई मामले सामने आए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय में किसी छात्र को एक विषय में बहुत कम अंक दिए गए थे। जब उसने उत्तर पुस्तिका देखी तो पता चला कि उसका मूल्यांकन सही नहीं किया गया था। उस छात्र ने उच्च न्यायालय का द्वार खटखटाया तो उसे मुआवजा मिला। यह घोर लापरवाही का मामला था।
ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जब किसी शिक्षक ने उत्तर पुस्तिकाएं लेकर अपने बच्चों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को दे दीं। जब किसी प्रतिभाशाली छात्र की उत्तर पुस्तिका ऐसे लोगों के हाथ लगी होगी तो उन्होंने कितनी गंभीरता से अंक दिए होंगे? ये लोग हर साल अनेक छात्रों की मेहनत पर पानी फेरते हैं। एआई के दौर में उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के तौर-तरीके बदलने की जरूरत है। इसका यह मतलब नहीं कि मूल्यांकन में शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं होगी। एआई को उनका सहायक बनाना चाहिए। जो बोर्ड परीक्षा आयोजित करे, उसे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए एक एआई टूल विकसित करना चाहिए। इसके बाद हर उत्तर पुस्तिका उस पर अपलोड कर दी जाए। एआई टूल हर जवाब को पढ़े और शिक्षक को सलाह दे कि उसके लिए इतने अंक दिए जा सकते हैं। शिक्षक की अनुमति के बाद सारे अंक जोड़े जाएं। इससे उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के काम में पारदर्शिता आएगी। शिक्षकों पर दबाव कम होगा। अंक जोड़ने में गलती की आशंका न के बराबर होगी। हर उत्तर पुस्तिका का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। कोई विवाद होने पर स्थिति जल्दी स्पष्ट होगी। जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। यह पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होनी चाहिए। वहीं, शिक्षक द्वारा की गई लापरवाही को गंभीरता से लेना चाहिए। पुनर्गणना या पुनर्मूल्यांकन के लिए आने वाले आवेदनों का विश्लेषण एआई से कराया जाए। अगर एक ही शिक्षक द्वारा जांची गईं कई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए आवेदन आएं तो विशेष जांच होनी चाहिए। अगर कोई छात्र अन्य विषयों में बहुत अच्छे अंक प्राप्त करे, लेकिन एक या दो विषयों में बहुत कम अंक आएं तो उन उत्तर पुस्तिकाओं की विशेष जांच होनी चाहिए। आचरण में अनैतिकता का प्रदर्शन करने वाले और उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के काम में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को सेवाओं से हटा देना चाहिए। इससे कई छात्रों का भला हो जाएगा।