कल लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई: प्रियंका वाड्रा

कांग्रेस महासचिव ने एआईसीसी कार्यालय में कहा ...

Photo: IndianNationalCongress FB Page

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने शनिवार को यहां एआईसीसी कार्यालय में कहा कि कल लोकतंत्र की एक बड़ी जीत हुई। मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे हमने हरा दिया। यह संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्ष की एकता की जीत है- जो सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरे पर साफ दिख रही थी।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा। इन बातों से ही साफ़ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया। सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह बिल पारित करवा दे, ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए, जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि मोदी सरकार का मानना था कि अगर बिल पारित होगा तो उनकी जीत होगी और बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। भाजपा ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि भाजपा का महिलाओं के संदर्भ में एक इतिहास है। यह इतिहास बहुत स्पष्ट है। सिर्फ सदन में विपरीत कहने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। देश की महिलाओं ने उन्नाव को देखा, हाथरस को देखा, महिला खिलाड़ियों को देखा, मणिपुर की महिलाओं को देखा। मोदी सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली और आज संसद में 'महिलाओं का मसीहा' बनना चाहती है।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि यह महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है।

प्रियंका वाड्रा ने कहा कि मोदी सरकार को पहली बार धक्का लगा है, इसलिए इसे 'ब्लैक डे' कह रही है। यह धक्का लगना बहुत जरूरी था। आज महिलाओं का संघर्ष बहुत बढ़ चुका है। वे सरकार का पीआर और मीडियाबाजी देख रही हैं, समझ रही हैं। इसलिए अब वो सब नहीं चलेगा।

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