उच्चतम न्यायालय ने पवन खेड़ा को सुरक्षा देने से इन्कार किया

रिनिकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट पर की थी टिप्पणी

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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट रखने का आरोप लगाने के मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी थी।

उच्चतम न्यायालय ने खेड़ा से इस मामले में अग्रिम ज़मानत के लिए असम में उचित अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाने को कहा, और यह साफ़ कर दिया कि वहां की अदालत उनकी अर्ज़ी पर सुनवाई करते समय, अगर उच्चतम न्यायालय या तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कोई प्रतिकूल टिप्पणी की हो, तो उसे ध्यान में नहीं रखेगी।
 
बता दें कि 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेड़ा ने आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति है, जिनका ज़िक्र राज्य में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सरमा के हलफनामे में नहीं किया गया था।

सुनवाई के दौरान, असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि तेलंगाना हाई कोर्ट के पास क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि खेड़ा की याचिका में यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया।

मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया।

खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) और 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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