50% जनसंख्या नीति निर्धारण का ​हिस्सा बने, यह समय की मांग है: प्रधानमंत्री

लोकसभा में बोले मोदी

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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जरूरत तो यह थी कि 25—30 साल पहले, जब यह विचार सामने आया तभी इसे लागू कर देते। आज हम इसे काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते। आवश्यकतानुसार उसमें समय समय पर सुधार होते और यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मन: स्थिति एवं नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर कर एक राष्ट्र की अमानत बना देती हैं, एक मजबूत धरोहर तैयार करती हैं। भारत के संसदीय इतिहास में यह वैसा ही पल है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी सांसद इस महत्त्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। हम भारतीय मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को एक संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति के रूप-स्वरूप को तय करने के साथ देश की दिशा और दशा भी तय करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब, सिर्फ उत्तम प्रकार की रेल, कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर, रास्ते या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े ... सिर्फ इतने से वि​कसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ—सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या देश की नीति निर्धारण का ​हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कुछ भी हो, जिम्मेदार कोई भी हो। इसे हमें स्वीकार करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। साल 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से 25-30 साल पहले, जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया वो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना। पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर आईं बहनों में एक पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस है। पहले वो शांत रहती थीं, समझती थीं, लेकिन बोलती नहीं थीं। आज वो वोकल हैं। इसलिए आज जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो लाखों बहनें जो पंचायत में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, लोगों के सुख-दुख को गहराई से देखा है, वो आंदोलित हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो कहती हैं कि ​झाड़ू कचरा वाले काम में तो हमें जोड़ देते हो, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा और लोकसभा में होती हैं। इसलिए राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25—30 साल में ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। वो सिर्फ यहां नहीं, वहां भी आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं। जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।

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