देश की एक मशहूर आईटी कंपनी में कई महिलाओं द्वारा दर्जनभर सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के आरोपों का मामला अत्यंत गंभीर है। इसकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह दुर्भाग्य का विषय है कि भारत के बहुसंख्यक समाज में आज भी कई लोग अपने बच्चों को धर्म के बारे में कोई जानकारी नहीं देते। वे सिर्फ यही चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ें, लिखें और बहुत सारे रुपए कमाएं। पढ़ाई करना और धन कमाना गलत नहीं है। ये जीवन की जरूरतें हैं, लेकिन ये ही जीवन नहीं हैं। जिन बच्चों को अपने धर्म की पर्याप्त जानकारी नहीं होती, वे दूसरों के बहकावे में बहुत जल्दी आते हैं। कई माता-पिता सोचते हैं कि हमने बच्चों का एडमिशन अच्छे स्कूल या कॉलेज में करा दिया, बढ़िया मोबाइल फोन दे दिया, महंगा लैपटॉप थमा दिया तो हमारा कर्तव्य पूरा हो गया। वे उन्हें वेदों के बारे में कुछ नहीं बताते। घरों में कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं रखते। अगर रखते भी हैं तो उन पर कभी चर्चा नहीं करते। भगवान के विभिन्न अवतारों के बारे में कभी बात नहीं करते। हमारे तीर्थों का क्या महत्त्व है, इसकी जानकारी नहीं देते। अगर बच्चा पूछता है तो जवाब मिलता है- 'ये सब बुढ़ापे में सीख लेना, अभी पढ़ाई करो, नौकरी ढूंढ़ो।' क्या होगा अगर आपका बच्चा पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन करे, उसे बड़ी कंपनी में नौकरी मिल जाए और एक दिन कोई उसके मन में आपके और धर्म के खिलाफ जहर भर दे? यह एक मामूली सवाल नहीं है। पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब अपने धर्म के ज्ञान से बिल्कुल अनजान व्यक्ति को किसी और ने जाल में फंसा लिया!
हाल में उत्तर प्रदेश के एक पुलिस कांस्टेबल का मामला चर्चा में रहा, जिस पर एक महिला धर्मांतरण के लिए दबाव डाल रही थी। उसने कांस्टेबल के कागजात तक बनवा दिए थे और एक जमात में शामिल होने के लिए कह रही थी। जब कांस्टेबल ने इससे इन्कार किया तो उसे दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। आखिर में उस कांस्टेबल को पुलिस की ही मदद लेनी पड़ी और महिला को गिरफ्तार किया गया। जब एक कांस्टेबल के साथ यह हो सकता है तो आम आदमी कितना सुरक्षित है? ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल विश्वविद्यालय का है, जहां एक डॉक्टर पर यौन उत्पीड़न, आपत्तिजनक वीडियो बनाने और धर्मांतरण के लिए दबाव डालने के आरोप लगे थे। एक पाखंडी शख्स बाबा बनकर धर्मांतरण का गैंग चलाता पकड़ा गया था। उसके खिलाफ अदालतों में कई मामले हैं। उसने धर्मांतरण को धंधा बना लिया था। लोग उसके जाल में फंसते जाते थे और वह उनका शोषण करता था। धर्मांतरण के पक्ष में यह कुतर्क खूब दिया जाता है- 'आज सब पढ़े-लिखे लोग हैं। कोई बहला-फुसलाकर किसी का धर्मांतरण कैसे करा सकता है?' अगर धर्मांतरण के मामलों पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि निरक्षर और उच्च शिक्षित, दोनों ही तरह के लोगों को फंसाया जा सकता है। हां, उच्च शिक्षित व्यक्ति से यह उम्मीद जरूर की जाती है कि उसे सही-गलत की जानकारी ज्यादा होगी, लेकिन कई बार ऐसे लोग भी धोखे के शिकार हो जाते हैं। एक बहुचर्चित मामले में पीड़ित युवती ने स्वीकारा था कि प्रेम के वशीभूत होकर अपने सहकर्मी से शादी की थी। इसके लिए धर्मांतरण किया, जिसका उसके माता-पिता ने काफी विरोध किया था। उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन युवती नहीं मानी। शादी के बाद पता चला कि उसे जो सुनहरे सपने दिखाए गए थे, वे सब झूठे थे। ससुराल पक्ष ने उस युवती की सारी बचत हड़प ली और मनमानी शर्तें थोपने लगे थे। आखिर में उसे अपने मां-बाप के पास आना पड़ा। अगर अपने बच्चों को ऐसी घटनाओं से बचाना चाहते हैं तो उन्हें धर्म का ज्ञान जरूर दें। यह सोचकर अति-आत्मविश्वास न पालें कि 'ऐसा दूसरों के साथ हो सकता है, हमारे साथ नहीं हो सकता है।' मुसीबत कभी सूचना देकर नहीं आती। अपने धर्म का ज्ञान ही आपका कवच बनेगा।