वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि युद्ध को समाप्त करने के लिए इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की दिशा में कदम बढ़ाया है, और अब चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए अगला कदम उठाना तेहरान पर निर्भर है।
अमेरिका और ईरान सप्ताहांत में इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी शांति वार्ता में किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। वॉशिंगटन का कहना है कि तेहरान ने परमाणु ईंधन के संवर्द्धन के अपने अधिकार को छोड़ने से इन्कार कर दिया।
वेंस ने कहा, 'मैं सिर्फ़ यह नहीं कहूंगा कि चीज़ें गलत हुईं। मुझे यह भी लगता है कि चीज़ें सही हुईं। हमने काफ़ी प्रगति की है।'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, 'वे हमारी दिशा में आगे बढ़े, इसीलिए मुझे लगता है कि हम कह सकते हैं कि हमें कुछ अच्छे संकेत मिले, लेकिन वे पर्याप्त दूरी तक आगे नहीं बढ़े।' जेडी वेंस ने ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर को शामिल करते हुए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची शामिल थे। वेंस ने ज़ोर देकर कहा कि अगर ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर अमेरिका की रेड लाइन्स पूरी हो जाती हैं, तो यह दोनों देशों के लिए एक बहुत ही अच्छा सौदा हो सकता है।
वेंस ने कहा, 'चाहे हमारी आगे और बातचीत हो, या आखिरकार कोई समझौता हो जाए, मुझे सच में लगता है कि गेंद अब ईरान के पाले में है, क्योंकि हमने बातचीत की मेज़ पर बहुत कुछ रखा है।'
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान में शांति वार्ता अंततः इसलिए समाप्त हो गई, क्योंकि ईरानी वार्ताकार किसी समझौते को अंतिम रूप देने में असमर्थ रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इन चर्चाओं से इस बात की जानकारी मिली कि तेहरान में निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है।
उन्होंने कहा, 'हमने यह समझा कि वे ऐसा नहीं कर पाए— मेरा मानना है कि जो टीम वहां मौजूद थी, वह कोई समझौता नहीं कर पाई। 'उन्हें तेहरान वापस जाना पड़ा — चाहे सर्वोच्च नेता के पास या किसी और के पास — और असल में उन शर्तों के लिए मंज़ूरी लेनी पड़ी जो हमने तय की थीं।'
वेंस ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने के मुद्दे पर वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 100 प्रतिशत सहमत हैं।