तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने पड़ोसी देशों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। उसने मीडिया में चल रहीं ऐसी खबरों को अमेरिकी और इज़राइली साज़िश का हिस्सा बताया है।
आईआरजीसी ने एक बयान में घोषणा की कि विभिन्न समाचार एजेंसियों ने ऐसी जानकारी प्रसारित की है, जिसमें फ़ारस की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित कई देशों में मौजूद ठिकानों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का आरोप लगाया गया है।
आईआरजीसी ने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सशस्त्र बलों ने संघर्ष-विराम के घंटों के दौरान किसी भी देश की ओर कोई मिसाइल लॉन्च नहीं की है।
बयान में कहा गया कि यदि मीडिया रिपोर्टें सही हैं, तो यह निस्संदेह विरोधियों, विशेष रूप से ज़ायोनी शासन या अमेरिका, द्वारा रची गईं साज़िशों की ओर संकेत करता है।
इसके अलावा, आईआरजीसी ने ज़ोर देकर कहा कि यदि ईरानी सशस्त्र बल किसी भी लक्ष्य पर हमला करते हैं, तो वे ऐसा पूरी हिम्मत के साथ करेंगे और एक आधिकारिक बयान जारी करके इसकी घोषणा करेंगे।
उसने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लामिक गणराज्य ईरान के औपचारिक बयानों में जिन कार्यों का ज़िक्र नहीं है, उनका ईरानी सैन्य बलों से कोई संबंध नहीं है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक अल्टीमेटम जारी किया था, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम पर सहमति बन गई। इस दौरान इस्लामाबाद में बातचीत होगी। ईरान ने चर्चा के आधार के तौर पर दस-सूत्रीय योजना का प्रस्ताव रखा है, जिसमें इस क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करना जैसी शर्तें शामिल हैं।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने 8 अप्रैल को इस बात पर ज़ोर दिया कि इस आक्रामकता के परिणामस्वरूप ईरान को ऐतिहासिक विजय प्राप्त हुई, जिसने अमेरिका को बातचीत की शर्तों को स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया। इन शर्तों में गैर-आक्रामकता की गारंटी की योजना और शत्रुता की समाप्ति शामिल थी।