दिल्ली पुलिस द्वारा 'ऑपरेशन साय-हॉक' के दौरान 600 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी और 8,300 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में साइबर अपराध गहरी जड़ें जमा चुका है। देश के कई शहर साइबर अपराधियों के गढ़ बनते जा रहे हैं। ये अपने काम में इतनी महारत हासिल कर चुके हैं कि आम लोगों के अलावा उच्च शिक्षित और अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ भी इनके शिकार बन रहे हैं। उत्तराखंड में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को साइबर ठगों ने 10 लाख रुपए का चूना लगा दिया। उन्होंने अपने सेवाकाल में हजारों खाता धारकों को सलाह दी होगी, अपनी धनराशि को सुरक्षित रखने के तरीके बताए होंगे, लेकिन जब खुद झांसे में आए तो अपनी कमाई गंवा बैठे। पुणे के एक 75 वर्षीय डॉक्टर रातोंरात मालामाल होना चाहते थे। उनके पास लगभग 12 करोड़ रुपए थे। उन्हें किसी ने वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़कर सलाह दी कि 'अपनी धनराशि हमारी योजना में निवेश कीजिए और भरपूर मुनाफा कमाइए।' उन्होंने अनजान व्यक्ति पर विश्वास कर निवेश कर दिया। कुछ दिन बाद उन्होंने अपना मुनाफा मांगा तो धमकी मिली। उनके करोड़ों रुपए डूब गए। इतने उच्च शिक्षित व्यक्ति ने सिर्फ मोबाइल फोन पर मिले प्रस्ताव को सच मान लिया! पुणे में ही एक बुजुर्ग महिला, जो आर्थिक रूप से जागरूक और उच्च शिक्षित हैं, को साइबर अपराधियों ने नकली सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर धमकाया और चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इसके बाद उनसे 97 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। दिल्ली के एक प्रोफेसर को केवाईसी अपडेट कराने के लिए कहा गया। उन्होंने साइबर ठगों को ओटीपी समेत पूरा विवरण दे दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि प्रोफेसर के 15 लाख रुपए निकल गए।
हैदराबाद के एक वकील को फोन पर बताया गया कि उनके पार्सल में अवैध सामग्री मिली है। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया। उनसे लाखों रुपए ठग लिए गए। वकील को यह भी नहीं पता था कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। हाल में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो गए। उन्हें साइबर ठगों ने इतना धमकाया कि उनके खातों में एक करोड़ रुपए से ज्यादा ट्रांसफर कर दिए। साइबर ठगी का यह तरीका इतना प्रचलित हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में लोगों को सावधान किया था। इसके बावजूद लोग फंसते जा रहे हैं। उच्च शिक्षित लोग ज्यादा ठगे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि आईटी प्रोफेशनल भी साइबर ठगों के झांसे में आ रहे हैं! जो तकनीक के बड़े जानकार हैं, वे साइबर जालसाजों की चाल समझने में गलती कर रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह है- अति–आत्मविश्वास। कई उच्च शिक्षित लोग सोचते हैं- 'मुझे तो बहुत जानकारी है, इसलिए कोई व्यक्ति धोखा नहीं दे सकता।' यह सोच उन्हें थोड़ा लापरवाह बना देती है। वे लोग भी साइबर ठगों के जाल में ज्यादा फंस रहे हैं, जो नियमित रूप से समाचार नहीं पढ़ते। अक्सर लोग घंटों सोशल मीडिया देखते हैं, लेकिन 15 मिनट अख़बार नहीं पढ़ना चाहते। उन्हें लगता है कि समाचार पढ़ना-सुनना समय की बर्बादी है। उन्हें इसका महत्त्व तब पता चलता है, जब साइबर ठगी के बाद कोई जागरूक व्यक्ति कहता है- 'क्या आप अख़बार नहीं पढ़ते? वहां तो ऐसे समाचार रोजाना छप रहे हैं!' सरकार साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, नए नियम लागू कर रही है, लेकिन ऐसे अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं। इनसे सुरक्षित रहने के लिए खुद को जागरूक होना पड़ेगा। अपने धन की सुरक्षा करने के लिए अपने ज्ञान में रोजाना थोड़ा-थोड़ा निवेश करना होगा।