मुंबई/दक्षिण भारत। रिज़र्व बैंक ने पश्चिम एशियाई युद्ध में संघर्ष-विराम के चलते वैश्विक सुधार की उम्मीदों के बीच ब्याज दरें अपरिवर्तित रखीं। यह नीतिगत फ़ैसला ऐसे समय में आया है, जब डेढ़ महीने से चल रहे पश्चिम एशिया के युद्ध ने ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर दिया है, कच्चे तेल की क़ीमतें बढ़ा दी हैं और आयात पर निर्भर देशों के लिए वित्तीय और मुद्रास्फीति संबंधी दबाव पैदा कर दिया है।
पिछले महीने सरकार द्वारा रिजर्व बैंक के लिए महंगाई का नया लक्ष्य घोषित किए जाने के बाद, यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा है। सरकार ने रिजर्व बैंक से कहा है कि वह मार्च 2031 तक अगले पांच वर्षों के लिए खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत पर बनाए रखे, जिसमें दोनों तरफ 2 प्रतिशत की छूट की गुंजाइश हो।
मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से अल्पकालिक ऋण दर या रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर, एक तटस्थ रुख के साथ, बनाए रखने का निर्णय लिया है।
ब्याज दरों में कटौती पर यह रोक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित खुदरा महंगाई दर के चलते लगाई गई है, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत पर पहुंचकर रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम-अवधि के लक्ष्य के करीब आ गई थी।
इसके अलावा, युद्ध शुरू होने के बाद से रुपए का मूल्य 4 प्रतिशत से अधिक गिर गया है, जिसका परिणाम आयातित महंगाई को बढ़ाने के रूप में सामने आया है।
हालाँकि, अमेरिका और ईरान द्वारा संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मज़बूत होकर 92.56 पर पहुंच गया है।
एमपीसी की सिफ़ारिश के आधार पर, रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई में नरमी के बीच फरवरी, अप्रैल और दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 25 बीपीएस की कटौती की, और जून में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की।
अक्टूबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई दर गिरकर 0.25 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है।