कारोबारी माहौल में लाएं बड़े सुधार

बड़े स्तर पर कई सुधारों की जरूरत है

धरातल पर चीजों को सुधारना होगा

जन विश्वास विधेयक को संसद की मंजूरी देश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। हालांकि अभी बड़े स्तर पर कई सुधारों की जरूरत है। सरकार को इस काम की रफ्तार बढ़ानी होगी। धरातल पर चीजों को सुधारना होगा, जहां दशकों से समस्याएं मौजूद हैं। भारत विशाल क्षेत्रफल और बड़ी आबादी वाला देश है। यहां वस्तुओं और सेवाओं की बहुत मांग है। इसके बावजूद युवाओं का रुझान उद्यमिता की ओर नहीं है! वे सिर्फ ऐसी सरकारी नौकरी चाहते हैं, जिसमें कुर्सी पर बैठे रहें और महीने की एक तारीख को मोटा वेतन उनके बैंक खाते में आ जाए। इस सोच ने भारत में बेरोजगारी को जन्म दिया है। यहां सरकारी नौकरी को ही रोजगार मानने की प्रवृत्ति ने कई आर्थिक और सामाजिक समस्याएं खड़ी कर दी हैं। विकसित देशों में काम का सम्मान है। वहां उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाता है। उन देशों में उद्योग शुरू करना भी मुश्किल नहीं होता है। हमारे देश में दुर्भाग्य से ऐसा माहौल बन गया, जिसमें उद्यमिता को हतोत्साहित किया गया। उसे स्कूली पाठ्यक्रम में भी न के बराबर जगह मिली। अगर कोई व्यक्ति जोखिम लेकर अपना काम शुरू कर दे तो उसके सामने बहुत बाधाएं आती हैं। हालांकि पिछले एक दशक में हालात थोड़े बेहतर हुए हैं, लेकिन अभी कई सुधारों की जरूरत है। इसे हम एक सामान्य उदाहरण से समझ सकते हैं। किसी गांव में एक प्रतिभाशाली किशोर जूते बनाने में रुचि रखता है। वह भविष्य में एक अच्छा उद्यमी बनकर दर्जनों लोगों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन कर सकता है। अब समस्या कहां है? उसे प्रोत्साहन देने वाला कोई नहीं है। इस मामले में स्कूली पाठ्यक्रम तो मौन ही है। अगर वह किसी से पूछेगा तो यह जवाब मिलेगा, 'तुम तो पढ़ाई में अच्छे हो। किस काम में फंसने जा रहे हो? जाओ, किसी सरकारी नौकरी की तैयारी करो। जब कुछ न बन पाओ, तब यह काम कर लेना।'

अगर वह लड़का भविष्य में कहीं से प्रशिक्षण लेकर गांव में एक छोटी-सी दुकान खोलने की कोशिश करे तो उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे। किसी तरह ये काम हो जाएं, उसके बाद भी संघर्ष कम नहीं होगा। उसके काम को वह सम्मान नहीं मिल पाएगा, जिसका वह हकदार है। वहीं, यह लड़का शहर जाकर किसी विदेशी जूता कंपनी में नौकरी करने लग जाए तो गांव में उसके चर्चे होंगे। उसका सम्मान बढ़ जाएगा। पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार कहेंगे कि फलां ब्रांड के साथ जुड़ गया है। जो लड़का अपना ब्रांड बना सकता था, अपने गांव के कई लोगों को रोजगार दे सकता था, उसे विदेशी कंपनी का कर्मचारी बनकर संतुष्ट होना पड़ा। क्या देश में ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकती, जो बच्चों को उद्यमी बनना सिखाए? यही एक तरीका है, जिससे बेरोजगारी और गरीबी का निवारण किया जा सकता है। बच्चों के मन में उद्यमी बनने की सोच पैदा की जाए। उनके लिए ऐसा पाठ्यक्रम होना चाहिए, जो रटने पर नहीं, बल्कि सोचने, समझने, सीखने और स्वावलंबी बनने पर जोर दे। प्रशासन ऐसा होना चाहिए, जो उद्यमियों का ख़याल रखे। जो व्यक्ति उद्यम लगाना चाहे, उसे सिर्फ एक एसएमएस करना पड़े। उसके बाद बिजली-पानी-गैस कनेक्शन कराने, बैंक खाता खुलाने समेत ऐसे सारे काम, जिनका संबंध सरकारी दफ्तरों से है, वे प्रशासन आगे बढ़कर खुद करके दे। उस व्यक्ति के रास्ते में कोई रुकावट न रहे। देश में कारोबारी माहौल बेहतर होने से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। जब ज्यादा संख्या में युवाओं के पास रोजगार होगा तो कई अपराध अपनेआप कम हो जाएंगे। इससे लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। भारत को अपनी आबादी को ताकत बनाना होगा। इसके लिए यह बिल्कुल सही समय है।

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