होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह से आईआरजीसी के नियंत्रण में है: ईरान

इज़राइली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी

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तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने घोषणा की है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह से उसके नौसैनिक नियंत्रण में है। साथ ही, उसने इस क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन अभियानों की एक सीरीज का भी विस्तृत विवरण दिया है।

बयान के अनुसार, विश्लेषण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से संकेत मिलता है कि सुबह से ही मध्य इज़राइली क्षेत्रों और मध्य पूर्व के विभिन्न हिस्सों की ओर ईरान के मिसाइल हमलों की तीव्रता, तेल अवीव और वॉशिंगटन के उन दावों के विपरीत है जिनमें कहा गया था कि ऐसे हमलों में 90 प्रतिशत की कमी आई है। बयान में यह भी कहा गया है कि इस बात को अमेरिकी और ज़ायोनी अधिकारियों द्वारा बार-बार प्रचारित किया गया है।

आईआरजीसी ने बताया कि 1 अप्रैल की सुबह से, उसकी नौसेना ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 89वीं लहर के तहत पांच बड़े और व्यापक अभियान चलाए हैं। इन अभियानों में अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं के प्रमुख सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए 'क़दीर' बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों के साथ-साथ हमलावर ड्रोनों का भी इस्तेमाल किया गया। 
 
इसमें आगे कहा गया कि पहली स्ट्राइक में, अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले और संयुक्त अरब अमीरात के जलक्षेत्र तथा द्वीपों में स्थित एक समुद्री ढांचे पर तैनात दो अर्ली-वॉर्निंग एयर डिफेंस रडार सिस्टम को बेहद सटीक तरीके से नष्ट कर दिया गया।

बयान में आगे कहा गया कि 'अवैध ज़ायोनी शासन' से संबंधित एक तेल टैंकर, जिसकी पहचान 'एक्वा 1' के रूप में हुई है, को मध्य फ़ारसी खाड़ी में सटीक रूप से निशाना बनाया गया और मिसाइल हमले के बाद उसमें आग लगने की सूचना मिली है।

आईआरजीसी के अनुसार, बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट की सीमा के बाहर उसकी सेना के एक छिपे हुए जमावड़े वाली जगह पर बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन और कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। फील्ड रिपोर्ट से पता चलता है कि हमले के बाद कई वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों को मनामा के अस्पतालों में ले जाया गया। 

इसमें यह भी कहा गया कि अल-उदेइरी बेस पर चिनूक हेलीकॉप्टर तैयारी केंद्र और उपकरणों के भंडारण वाले हैंगरों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के मिश्रण का उपयोग करके निशाना बनाया गया।

बयान में आगे कहा गया कि उत्तरी हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी विमानवाहक पोत समूह 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की ओर हमलावर ड्रोनों की कई लहरें भेजी गईं और उपग्रह तस्वीरों तथा दस्तावेज़ों के आधार पर, यह समूह अपनी पिछली स्थिति से और भी गहरे समुद्र की ओर पीछे हट गया।

खुफिया सूत्रों का हवाला देते हुए, इसमें आगे बताया गया कि यूएई में अमेरिकी अधिकारियों के जमा होने की एक जगह पर आईआरजीसी नौसेना के पहले के हमले में 37 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और कई अन्य घायल हो गए थे, जिन्हें बाद में अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

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