तेहरान/दक्षिण भारत। ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल के युद्ध के बीच हैकर भी सक्रिय हो गए हैं। एक समूह 'नासिर हैकर्स' ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की अल-साफ़ी तेल कंपनी पर साइबर हमला किया है।
'नासिर हैकर्स' समूह ने कहा कि उसने सऊदी अरब की अल-साफ़ी तेल कंपनी के ख़िलाफ़ साइबर हमला किया और ऐसी जानकारी तक पहुंच हासिल कर ली, जिसे उसने तेल अनुबंधों, निजी पत्राचार और पूरे साम्राज्य में मौजूद ईंधन स्टेशनों के विवरण से संबंधित गोपनीय जानकारी बताया है।
समूह ने कहा कि प्राप्त डेटा को उचित उपयोग के लिए संबंधित प्रतिरोधक तत्त्वों को सौंप दिया गया है।
इसने उन लोगों के लिए भी एक संदेश जारी किया, जिन्हें इसने 'सऊदी अरब के गद्दार' कहा। इसने उनसे आग्रह किया कि वे उस मार्ग पर लौट आएं जिसे सत्य और प्रतिरोध का मार्ग बताया गया है और खुद को इज़राइल से दूर रखें।
इससे पहले, हंडाला साइबर कलेक्टिव ने मोसाद की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और इज़राइली शासन के राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान में अंतरराष्ट्रीय मामलों की वर्तमान प्रमुख, डेबोरा ओपेनहाइमर के ईमेल खाते से 100,000 से अधिक गोपनीय दस्तावेज़ लीक करने के दावे किए थे।
हैकर्स के समूह ने कहा कि उनके द्वारा की गई सेंधमारी ने दशकों से चले आ रहे ज़ायोनी दुष्प्रचार, मीडिया में हेर-फेर और गुप्त अभियानों को बेनकाब कर दिया है, जिनका मकसद वैश्विक जनमत को दबाना था।
इसमें आगे कहा गया, 'वे वर्षों से दुनिया भर में ज़ायोनी विचारधारा को बढ़ावा देने और उसका विस्तार करने के लिए ज़िम्मेदार रही हैं और मीडिया में हेरफेर तथा शक्तिशाली लॉबिंग नेटवर्क के ज़रिए इस दमनकारी शासन के पक्ष में जनमत बनाने के लिए उन्होंने लगातार काम किया है। आज, उन्होंने लोगों की इच्छा के आगे घुटने टेक दिए हैं।'
हैकर्स ने कहा, 'इस साहसी ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, हमने उनके अकाउंट से 100,000 से ज़्यादा संवेदनशील ईमेल हासिल किए हैं, जो अब आम लोगों के डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं।'
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये दस्तावेज़ ज़ायोनिज़्म और उसके वैश्विक प्रभाव के नेटवर्क का असली चेहरा उजागर करते हैं, जिसमें विश्वासघाती गठजोड़ों से लेकर मीडिया की योजनाबंदी और विभिन्न राष्ट्रों के विरुद्ध रची गई गुप्त कार्रवाइयां तक शामिल हैं।