मुंबई/दक्षिण भारत। भूषण कुमार और विवेक रंजन अग्निहोत्री ने गुरुवार को अपनी नई फ़िल्म 'ऑपरेशन सिंदूर' की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह फ़िल्म पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा की गई लक्षित सैन्य कार्रवाई के कोडनेम से प्रेरित है।
यह फ़िल्म लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस 'टाइनी' ढिल्लों (सेवानिवृत्त) की किताब 'ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ इंडियाज़ डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान' पर आधारित होगी। अग्निहोत्री इस फ़िल्म का निर्देशन करेंगे। इस फ़िल्म का निर्माण कुमार की टी-सीरीज़ और अग्निहोत्री के 'आई एम बुद्धा प्रोडक्शंस' द्वारा किया जाएगा।
फिल्म निर्माताओं ने कहा कि यह फिल्म पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर भारत के लक्षित सैन्य हमलों से प्रेरित है, जो भारत के इतिहास में रणनीतिक संकल्प, साहस और सटीकता का एक निर्णायक क्षण है।
उन्होंने इस फ़िल्म को 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बेकसूर नागरिकों, जिनमें से ज़्यादातर पर्यटक थे, के नरसंहार पर एक सिनेमाई प्रतिक्रिया बताया।
भूषण कुमार ने कहा, 'कुछ कहानियां हम नहीं चुनते, बल्कि वे हमें चुनती हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' भी ऐसी ही एक कहानी है। एक ऐसी कहानी जिसे पूरी ईमानदारी, हिम्मत और ज़िम्मेदारी के साथ सुनाया जाना ज़रूरी है। यह सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं है, बल्कि एक बड़ा खुलासा है। जब कोई देश इतनी बड़ी घटनाओं से गुज़रता है तो उन घटनाओं को पूरी सच्चाई के साथ दर्ज करना बेहद ज़रूरी हो जाता है।'
निर्देशक-निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा, 'यह सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं है। यह एक बड़ा खुलासा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के ज़रिए भारत ने न सिर्फ़ पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया और पाकिस्तान को सज़ा दी, बल्कि आधुनिक युद्ध में अपनी ताक़त भी दिखाई।'
'हमने भारतीय सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के सहयोग से बड़े पैमाने पर और ज़मीनी स्तर पर शोध किया है, ताकि हम न केवल यह समझ सकें कि क्या हुआ, बल्कि यह भी जान सकें कि वह कैसे और क्यों हुआ। इस शोध से जो सच्चाई सामने आई है, वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी की तुलना में कहीं अधिक जटिल, कहीं अधिक सटीक और कहीं अधिक विचलित करने वाली है।'
उन्होंने कहा, 'मेरी कोशिश है कि हिम्मत, प्रोफेशनलिज़्म और रणनीतिक स्पष्टता की इस कहानी को दर्शकों तक पूरी सच्चाई के साथ पहुंचाऊं। साथ ही, इसे एक बेहद रोमांचक सिनेमाई अनुभव के तौर पर पेश करूं। मेरा मकसद शोर मचाना नहीं, बल्कि तथ्यों, स्पष्टता और सिनेमा के जादू के ज़रिए उस शोर का सामना करना है।'