साइबर ठग उठा रहे अफवाहों का फायदा

घबराहट में खरीदारी न करें

अफवाहों पर विश्वास न करें

एलपीजी की किल्लत संबंधी अफवाहों का फायदा जमाखोरों के साथ ही साइबर ठग उठा रहे हैं। ये लोगों को लूटने के लिए नए-नए तरीके ढूंढ़ रहे हैं। इनके खिलाफ सरकार कार्रवाई कर रही है। जनता को भी जागरूक होकर इनके झांसे से दूर रहना चाहिए। इस समय कई लोग घबराहट में सिलेंडर खरीद रहे हैं। वे समाचारों पर विश्वास करने के बजाय अफवाहों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे इस मानसिक दबाव में हैं कि 'किसी तरह सिलेंडर मिल जाए, उसके बाद मुझे कोई मतलब नहीं है।' साइबर ठग इस मानसिकता का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने इंटरनेट पर ऐसा जाल बिछा रखा है, जिससे बचने के लिए लोगों के पास पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। राजस्थान में कई लोगों ने गैस बुकिंग के लिए ऑनलाइन सर्च किया तो उनके सामने जो वेबसाइट खुली, वह बिल्कुल असली लगती थी। उन्होंने 500 रुपए से लेकर 2,000 रुपए तक का पेमेंट कर दिया, लेकिन किसी को सिलेंडर नहीं मिला। बाद में पता चला कि वह वेबसाइट फर्जी थी। यह तो एक घटना है। उत्तर प्रदेश में कई लोगों के मोबाइल फोन पर एक लिंक भेजा गया, जिसके बारे में दावा किया गया कि इस पर जानकारी देंगे तो तुरंत सिलेंडर मिल जाएगा। जिन लोगों ने लिंक पर क्लिक कर जानकारी दी, उनके पास ओटीपी आया और बैंक खातों से रुपए कट गए। बाद में पता चला कि यह साइबर ठगों की एक चाल थी। इसी तरह, दिल्ली में एक व्यक्ति से फोन पर कहा गया, 'आपको सिलेंडर चाहिए तो केवाईसी अपडेट करानी होगी।' इसके बाद उसे एक एपीके फाइल भेजी गई। व्यक्ति ने जैसे ही एपीके फाइल डाउनलोड की, उसका मोबाइल फोन हैक हो गया। साइबर ठगों ने उसके बैंक खाते से रुपए ट्रांसफर कर लिए।

कोलकाता में एक महिला के पास वीडियो कॉल आया। एक व्यक्ति ने खुद को एलपीजी एजेंसी का कर्मचारी बताया और 'वेरिफिकेशन' कराने का आग्रह किया। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों की मांग की। महिला को मालूम था कि साइबर ठग ऐसी गतिविधियां करते हैं। उसने कॉल को काट दिया। अगर वह दस्तावेज सौंप देती तो ठगी की शिकार हो जाती। कुछ लोग सिलेंडर लेने के लिए बहुत हड़बड़ी में हैं। उनके सामने जो लिंक आता है, उस पर क्लिक कर देते हैं; जो क्यूआर कोड मिल जाता है, उसे स्कैन कर देते हैं। चंडीगढ़ में एक व्यक्ति ने बुकिंग कन्फर्म करने के लिए एक क्यूआर कोड स्कैन कर पेमेंट कर दिया। उसके खाते से रुपए चले गए, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। मिलेगा भी कैसे, उसने जल्दबाजी में ठगों को पेमेंट कर दिया। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में एक और समस्या आ रही है। कई लोगों ने एलपीजी कस्टमर केयर नंबर सर्च किए तो साइबर ठगों के नंबर मिले। ठगों ने लोगों से ओटीपी, एटीएम एवं यूपीआई संबंधी विवरण मांगा। इस तरह कस्टमर केयर नंबर सर्च करना खतरनाक हो सकता है। आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर ही संपर्क करना चाहिए। तेलंगाना में तो साइबर ठगों ने वॉट्सऐप पर फर्जी एजेंसी ही बना दी। उन्होंने सस्ते गैस सिलेंडर और तुरंत डिलीवरी का ऑफर भी दिया। जिन लोगों ने उन्हें रुपए भेजे, उनके नंबर ब्लॉक कर दिए। उन्हें कोई सिलेंडर नहीं दिया। इस तरह ठगों ने नए-नए शिकार ढूंढ़े। नोएडा में एक उपभोक्ता को यह कहकर डराया गया कि 'आपका गैस कनेक्शन बंद होने वाला है, तुरंत वेरिफिकेशन कराएं।' उपभोक्ता ने 'वेरिफिकेशन' करा दिया और साइबर ठगों ने उसके खाते में सेंध लगा दी। इन घटनाओं में एक पैटर्न दिखता है- जो लोग डरकर, जल्दबाजी में, लालच में आकर गैस सिलेंडर लेना चाहते हैं, वे साइबर ठगों के आसान शिकार होते हैं। जो लोग देश-दुनिया की घटनाओं से बिल्कुल अनजान हैं, वे भी लपेटे में आ रहे हैं। इसलिए सावधान रहें, जागरूक रहें। घबराहट में खरीदारी न करें। किसी के बहकावे में न आएं। अफवाहों पर विश्वास न करें। जरूरत होने पर सही तरीके से ही गैस सिलेंडर लें।

About The Author: News Desk