तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने इज़राइली शासन की खुफिया एजेंसियों से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के दौरान जवाबी हमलों की 79वीं लहर सफलतापूर्वक अंजाम दी गई।
आईआरजीसी ने बताया कि खैबर-शिकन (खैबर-बस्टर), इमाद और सेज्जिल जैसी शक्तिशाली मिसाइलों के साथ-साथ आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स के विनाशकारी ड्रोनों ने इज़राइली शासन की बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा को सफलतापूर्वक भेद दिया।
इन हमलों में उत्तरी और मध्य तेल अवीव में इज़राइल की खुफिया एजेंसियों के कथित सुरक्षित ठिकानों; रामत गान और नेगेव में इज़रायली सेना के वाणिज्यिक और सहायता केंद्रों; तथा बीर शेवा में इज़राइली शासन के मुख्य लॉजिस्टिक्स और दक्षिणी सैन्य प्रबंधन केंद्र को निशाना बनाया गया।
आईआरजीसी के अनुसार, कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी इलाकों में धुएं और आग के घने बादल, और 20 लाख से ज़्यादा लोगों का लंबे समय तक शेल्टर्स में फंसे रहना, ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का ज़बर्दस्त सबूत है। यह दुश्मन के रक्षा तंत्र में आई रुकावट की ओर भी इशारा करता है।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि पेंटागन और 'अमान' द्वारा युद्ध से जुड़ीं खबरों और अमेरिकी ठिकानों तथा इजराइली सैन्य केंद्रों पर ईरान के हमलों की तस्वीरों पर की जा रही सुनियोजित सेंसरशिप, दुश्मनों की गहरी चिंता और वास्तविकता को छिपाने तथा तोड़-मरोड़कर पेश करने के उनके प्रयासों को दर्शाती है।
बता दें कि 28 फरवरी को इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्ला सैयद अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की हत्या के बाद, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया।