देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। इनकी निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद कुछ लोग ज्यादा से ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो देखकर अन्य लोगों में भय फैलता है, कई आशंकाएं जन्म लेती हैं। जो लोग अफरा-तफरी मचाते हुए खरीदारी करते हैं, वे सिर्फ अपने हितों की परवाह करते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपने भंडार भरकर बाकी जीवन आराम से गुजारेंगे। कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर अफवाह फैली थी कि देश में नमक की भारी कमी हो गई है। यह सुनते ही लोग दुकानों की ओर दौड़े और कई किलो नमक खरीद लिया था। उनमें ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने यह सोचकर एक बोरी से ज्यादा नमक खरीदा कि 'क्या पता, भविष्य में मिले या न मिले!' बाद में, वे हंसी के पात्र बने और उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हुआ। ईरान का इज़राइल-अमेरिका से युद्ध हमारे लिए एक आर्थिक चुनौती है, लेकिन यह कोरोना महामारी से बड़ी नहीं है। जब हमने वह मुसीबत पार कर ली तो यह क्या है? इसे भी पार कर लेंगे। सूझबूझ और समझदारी से हर बाधा पार कर सकते हैं। उससे कुछ सीखकर अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। दुनिया में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। नागरिकों, खासकर युवाओं को उनके लिए तैयार करना चाहिए। नई पीढ़ी में धैर्य कम है। उसे सबकुछ तुरंत चाहिए। उसमें कष्ट सहन करने की क्षमता भी कम है। वह बिजली, मोबाइल फोन और इंटरनेट के बिना एक दिन नहीं रह सकती। उसे थोड़ी दूर भी जाना हो तो वाहन चाहिए।
क्या ज्यादा सुविधाएं हमें कमजोर बना रही हैं? इन पर अतिनिर्भरता कहां तक ठीक है? आज कई घर ऐसे हैं, जहां एक दिन बिजली न आए तो लोगों के पास रोशनी के लिए मोमबत्ती तक नहीं है। शहरों में कितने युवा ऐसे हैं, जो लालटेन साफ करना, उसमें बत्ती लगाना जानते हैं? उन्हें इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि चौबीसों घंटे बिजली रहती है। हमारे चारों ओर मशीनें हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। अगर किसी कारणवश ये काम न कर पाएं तो क्या जीवन रुक जाएगा? हमें इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बेहतर तो यह होगा कि हर महीने-दो महीने बाद ऐसे अभ्यास किए जाएं, जिनमें हमारी शक्ति और सामर्थ्य की परख हो। क्या हम एक दिन बिजली, पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल किए बिना रह सकते हैं? अगर कुछ दिनों तक हरी सब्जियों की आपूर्ति बाधित हो जाए तो हमारे घरों में कौनसी चीजें उनका विकल्प बन सकती हैं? क्या हम अपने घरों की खाली जमीनों या छतों पर सब्जियां उगा सकते हैं? अगर किसी दिन फोन और इंटरनेट काम न करें तो जरूरी संदेश पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था हो सकती है? शहरों में लोग दुकानों से आटा खरीदते हैं। इसके साथ घर में महीनेभर का अनाज और छोटी हाथ चक्की रखना सुविधाजनक होगा। सोचिए, भविष्य में किसी जगह ऐसी परिस्थिति पैदा हो जाए, जहां कुछ दिनों तक आटा पहुंचाना संभव न हो तो क्या होगा? उस समय आत्मनिर्भरता की जीवन शैली ही काम आएगी। जिसे इसकी कोई जानकारी नहीं है, वह क्या करेगा? पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया गया था। हालांकि यह सुधरा नहीं है। सोचिए, अगर भविष्य में भारत सरकार इस पड़ोसी देश के खिलाफ बहुत बड़ी कार्रवाई करने का फैसला ले तो उसके लिए आम नागरिकों की कितनी तैयारी है? क्या हम कुछ दिनों के लिए सुख-सुविधाएं छोड़ सकेंगे? जीवन फूलों की सेज नहीं है। यहां ठंडी छाया के बाद कांटे और लू के थपेड़े भी आ सकते हैं। जो लोग पहले से तैयार रहते हैं, वे ही विजयी होते हैं।