आत्मसमर्पण करेगा ईरान? राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजराइल के लिए दिया बड़ा बयान

'सशस्त्र बलों को निर्देश दिया गया है कि वे पड़ोसी देशों पर हमला न करें ...'

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तेहरान/दक्षिण भारत। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल से कहा कि ईरान को आत्मसमर्पण करते देखने की कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

एक वीडियो संदेश में, जो शनिवार को जनता के लिए जारी किया गया, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने ईरान के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और जोर देकर कहा कि सभी मौजूदा मतभेदों को एक तरफ रखा जाना चाहिए, क्योंकि देश अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध का सामना कर रहा है।

राष्ट्र की एकता का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सभी को एकजुट होकर अपनी मातृभूमि की रक्षा में शक्ति के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि राष्ट्र वर्तमान संकट से गरिमा के साथ उभरने तक दृढ़ता से खड़ा रहेगा। 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बिना शर्त आत्मसमर्पण के बारे में जो भी धारणा है, वह एक ऐसा सपना है जिसे ईरान के शत्रुओं को कब्र में ले जाना चाहिए और वे इसे कभी पूरा नहीं होते देखेंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मौलिक मानवीय सिद्धांतों के पालन पर फिर से ज़ोर दिया और कहा कि इनका सम्मान सभी राष्ट्रों द्वारा किया जाना चाहिए।

पेज़ेशकियन ने पड़ोसी देशों से भी क्षमा मांगी, जिन पर ईरान द्वारा आक्रमण किया गया था। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई, कई सैन्य कमांडर और आम लोग दुश्मनों की बर्बर आक्रामकता के कारण शहीद हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब कमांडर अनुपस्थित होते हैं, तब साहसी सशस्त्र बल सम्मान के साथ मातृभूमि की रक्षा में निर्णायक कदम उठाते हैं। 

पेज़ेशकियन ने स्पष्ट किया कि ईरान का पड़ोसी देशों पर आक्रमण करने का कोई इरादा नहीं है और उन्होंने दोहराया कि वे अपने पड़ोसियों को भाइयों के रूप में मानते हैं। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सहयोग का आह्वान किया।

पेज़ेशकियन ने हाल में अस्थायी नेतृत्व परिषद की बैठक में लिए गए एक फैसले की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान के सशस्त्र बलों को निर्देश दिया गया है कि वे पड़ोसी देशों पर हमला न करें और न ही मिसाइलें दागें, जब तक कि उन देशों से ईरान पर हमला करने का इरादा न हो।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पड़ोसी देशों के साथ विवादों को संघर्ष के माध्यम से नहीं, बल्कि कूटनीति के जरिए हल करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

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