देवेंद्र शर्मा बनारस यात्रा पर
बनारस/दक्षिण भारत। भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तरप्रदेश का सबसे प्राचीन शहर ’काशी’, जिसे भगवान शंकर की नगरी कहा जाता है। काशी को बनारस, वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। काशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू श्रद्धालुओं के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान प्राप्त है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहां विश्वनाथ या विश्वेश्वर के नाम से पुकारा जाता है। उत्तरप्रदेश के प्राचीन और आध्यात्मिक नगर वाराणसी में स्थित ‘काशी विश्वनाथ धाम’ ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय परिवर्तन का सफर तय किया है।
काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्रा ने कर्नाटक से आए मीडिया प्रतिनिधिमंडल से संवाद करते हुए धाम परियोजना के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार वर्ष 1669 में मुगल शासक औरंगज़ेब के काल में प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था, जबकि वर्तमान संरचना का निर्माण वर्ष 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया। बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने इसके शिखरों पर सोना चढ़वाकर इसे विशिष्ट पहचान प्रदान की। उन्होंने बताया कि पहले मंदिर का कुल क्षेत्रफल लगभग 3 हजार वर्गफीट तक सीमित था। मंदिर के आसपास संकरी गलियां, अत्यधिक भीड़ और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सुरक्षा और प्रबंधन के क्षेत्र में भी कई चुनौतियां थीं।
सीईओ मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ’काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना’ प्रारंभ की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य मंदिर को सीधे गंगा नदी से जोड़ना और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना था। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आधुनिक अवसंरचना, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सामाजिक कल्याण के समग्र मॉडल के रूप में भी उभरकर सामने आई है, जो भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों के लिए प्रेरणा बन सकती है। इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 3 हजार वर्ग फुट से बढ़ाकर लगभग 5 लाख वर्गफीट कर दिया गया। लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुई इस परियोजना में 314 संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया तथा 1,400 लोगों का पुनर्वास किया गया।
अधिकारियों के अनुसार पूरा कार्य बिना किसी न्यायिक विवाद के संपन्न हुआ। विश्व भूषण मिश्रा ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम आध्यात्मिकता और सुशासन का पुनर्जागरण है, जहां प्राचीन धार्मिक परंपरा और आधुनिक प्रशासनिक दक्षता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस नए परिसर में 27 विशेष निर्माण किए गए हैं, जिनमें यात्री सेवा केंद्र, अतिथि गृह, संग्रहालय, आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र, जलपान केंद्र (फूड कोर्ट) तथा गंगा की ओर दर्शनीय दीर्घाएं शामिल हैं। मंदिर विस्तारीकरण के बाद श्रद्धालु क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि मद्देनजर धाम में अब एक समय में 50 हजार श्रद्धालुओं को समायोजित करने की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए 300 सीसीटीवी कैमरे, आधुनिक बैगेज स्कैनर तथा बहु-एजेंसी सुरक्षा व्यवस्था तैनात है, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस, सीआरपीएफ, एनडीआरएफ, पीएसी और निजी सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के माध्यम से भीड़ प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
धाम की धार्मिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए मिश्रा ने कहा कि मंदिर में प्रतिदिन पांच बार आरतियां होती हैं-मंगला आरती, भोग आरती, सप्तऋषि आरती, श्रृंगार आरती और शयन आरती। इसके अतिरिक्त प्रदोष, पूर्णिमा, मास शिवरात्रि और अन्य धार्मिक आयोजन भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। शंकराचार्य चौक स्थित सेवार्चनम मंच पर स्थानीय और राष्ट्रीय कलाकार सनातन परंपरागत कलाओं की प्रस्तुति देते हैं। ‘संवर्धन’ पहल के अंतर्गत संस्कृत विद्यालयों को सहयोग, विद्यार्थियों को गणवेश एवं वैदिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है तथा डीबीटी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने मंदिर की नई पहल ‘संस्कृति के अदला-बदली’ के तहत धाम की ओर से आसपास के मंदिरों को भेजे जाने वाले श्रृंगार व आवश्यक सामग्री के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि श्रृंगारमेल, संगम तीर्थ आदि अन्य नवाचार भी गतिमान है जिसके तहत धाम विभिन्न तीर्थों में संगम तीर्थ भेजने की व्यवस्था करता है। उन्होंने बताया कि धाम ट्रस्ट का प्रयास रहता है कि पूरा तीर्थ ’प्लास्टिक फ्री’ हो। उन्होंने काशी धाम के बारे में विभिन्न जानकारी दी तथा मीडिया प्रतिनिधिमंडल को मंदिर प्रांगण का अवलोकन कराया।
इस अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) बेंगलूरु की सहायक निदेशक करिश्मा पंत,बनारस पीआईबी के प्रशांत कक्कड़ आदि अनेक अधिकारी उपस्थित थे।