केंद्र सरकार ने डीपफेक पर लगाम लगाने और एआई से तैयार सामग्री के प्रबंधन के संबंध में ऑनलाइन मंचों के लिए जो नियम बनाए हैं, वे झूठ के प्रसार पर पाबंदी लगाने में काफी मददगार साबित होंगे। हालांकि इन नियमों से चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हो जाएंगी। एआई के विस्तार के साथ डीपफेक के स्वरूप बदलते जाएंगे। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को उनसे सावधान रहना होगा। वर्तमान में सोशल मीडिया पर एआई द्वारा निर्मित अनगिनत फेक वीडियो मौजूद हैं। उन पर कई लोगों ने भरोसा किया है। एक चैनल पर ग्रामीण परिवेश के वीडियो पोस्ट किए जाते हैं। उनमें एक युवती दिखाई देती है, जिसे सैकड़ों युवक प्रेम प्रस्ताव और विवाह प्रस्ताव भेज चुके हैं। हकीकत यह है कि इस दुनिया में उस युवती का कोई अस्तित्व ही नहीं है। वह एआई द्वारा निर्मित है। उसका चैनल पाकिस्तान से संचालित किया जाता है। 'युवती' को प्रस्ताव भेजने वाले ज्यादातर लोग भारतीय हैं। सोचिए, क्या आईएसआई ऐसे लोगों को हनीट्रैप के जरिए शिकार बनाकर भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकती? इसी तरह सोशल मीडिया मंच पर एक पेज है। उस पर लोगों को जल्द धनवान बनाने का दावा किया जाता है। घर बैठे, बिना मेहनत किए, मामूली निवेश से लाखों रुपए कमाने के सपने दिखाए जाते हैं। जो व्यक्ति इस 'निवेश योजना' का लाभ उठाना चाहता है, उससे जरूरी दस्तावेज मांगे जाते हैं। लोग बिना सोचे-समझे दस्तावेज भेज देते हैं। उन्हें पता ही नहीं कि पेज पर बताई गईं सारी योजनाएं फर्जी हैं और उनके निर्माण में एआई की मदद ली गई है। अगर किसी दिन खबर मिले कि उन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों से वित्तीय धोखाधड़ी की गई है तो इस पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
अगर एआई का इस्तेमाल शिक्षाप्रद, उपयोगी और ज्ञानवर्द्धक सामग्री बनाने में हो तो उसका स्वागत है। कुछ लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उनके प्रयासों को सराहना मिल रही है। वहीं, कई वीडियो भ्रांतियां फैला रहे हैं। एक चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो की मानें तो भैंस पहाड़ से कूदेगी तो उड़ेगी! ऐसे वीडियो किशोर ज्यादा देखते हैं। उनके मन में जिज्ञासा होती है। अगर वह वीडियो देखकर कोई बच्चा अपने घर की छत पर चुपचाप जाए और उड़ान भरने की कोशिश में गलत कदम उठा ले तो क्या होगा? एआई का गलत इस्तेमाल किसी देश में बड़ी उथल-पुथल मचा सकता है। शत्रु एजेंसियां ऐसे मौके की ताक में रहती हैं। याद करें, 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत के कुछ ही दिन बाद भारतीय वायुसेना की एक अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में भारतीय सशस्त्र बलों के बारे में गलत दावे किए जा रहे थे। उन पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ भारतीय नागरिक सरकार की रणनीति पर सवाल उठाने लगे थे। हकीकत यह थी कि वह वीडियो फर्जी था। एआई की मदद से ऐसे कई वीडियो बनाए गए थे। उन सबमें झूठे दावे किए गए थे। ये वीडियो नागरिकों में डर और अविश्वास की भावना पैदा करते हैं। सोचिए, भविष्य में भारत सरकार पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करे और सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी वीडियो की बौछार होने लगे तो उन्हें देखकर लोगों के मनोबल पर क्या असर होगा? एआई शुरुआती दौर में है। अपराधियों ने अभी से इसके जरिए उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। पांच-दस साल बाद जब यह तकनीक ज्यादा उन्नत हो जाएगी, तब अपराधों का ग्राफ किस रफ्तार से ऊपर जाएगा? भारतीय एजेंसियों को इन बदलावों पर कड़ी नजर रखनी होगी। उन्हें चार कदम आगे रहना होगा, ताकि अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब न हो पाएं। आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के साथ डिजिटल सुरक्षा को भी मजबूत बनाना होगा।