मुंबई/दक्षिण भारत। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को जनसंख्या असंतुलन के पीछे तीन मुख्य कारणों के रूप में धर्मांतरण, घुसपैठ और कम जन्म दर की पहचान की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध के अनुसार 'एक परिवार में तीन बच्चे होने चाहिएं', हालांकि यह एक व्यक्तिगत पसंद का विषय है।
उन्होंने लोगों का धर्म परिवर्तन कराने और किसी संप्रदाय की संख्या बढ़ाने के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन या धोखे के इस्तेमाल की निंदा की और कहा कि अपने मूल धर्म में लौटने की इच्छा रखने वालों के लिए घर वापसी ही समाधान है।
घुसपैठ से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता भाषा के आधार पर संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करते हैं और उनकी सूचना अधिकारियों को देते हैं।
भागवत यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे।
जनसंख्या असंतुलन पर भागवत ने कहा, 'इसके तीन मुख्य कारण हैं: पहला है धर्मांतरण, जबकि धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित है, लोगों का धर्म बदलवाने और किसी संप्रदाय की संख्या बढ़ाने के लिए बल, प्रलोभन या धोखे का इस्तेमाल पूरी तरह निंदनीय है।'
उन्होंने विश्वास की स्वतंत्रता को रेखांकित करने के लिए कवि नारायण वामन तिलक का उदाहरण दिया। साथ ही कहा कि अपने मूल धर्म में लौटने की इच्छा रखने वालों के लिए 'घर वापसी' ही समाधान है।